थार्नडाइक के सीखने/अधिगम के नियम-जीव जंतु ,पशु पक्षी, मानव ,सभी प्रकृति के किसी न किसी नियम के अनुसार जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
सीखने की प्रक्रिया भी इसी तरह नियमों के हिसाब से चलती है।

थार्नडाइक ने सीखने के तीन मुख्य या प्राथमिक नियम और 5 गौण या द्वितीयक नियम दिए हैं

सीखने के मुख्य नियम-3

  1. तत्परता का नियम low of readiness
    जब हम किसी कार्य को करने के लिए तत्पर होते हैं तो उसे शीघ्र सीख लेते हैं
    समस्या को हल करने के लिए प्रयत्नशील होना तत्परता है।
  2. अभ्यास का नियम law of practice
    अभ्यास कुशल बनाता है
    यदि हम किसी कार्य का अभ्यास करते हैं तो उसे सफलतापूर्वक सीख जाते हैं और उसमें कुशल हो जाते हैं
    अगर सीखे हुए कार्य का अभ्यास नहीं करते हैं तो उसे भूल जाते हैं

अभ्यास से सीखना स्थायी हो जाता है इसे उपयोग का नियम कहते हैं
बिना अभ्यास से ज्ञान विस्मृत हो जाता है इसे अनुपयोग का नियम कहते हैं।

  1. प्रभाव का नियम/परिणाम का नियम/संतोष का नियम
    Law of effect /logo of satisfaction

प्राय हम उस कार्य को ज्यादा अच्छे से करना चाहते हैं जिसका परिणाम हमारे लिए हितकर होता है जिससे हमें सुख और संतुष्टि मिलती है
यदि कष्ट होता है तो हितकर नहीं है तो कार्य को नहीं दोहराते हैं

सीखने के गौण नियम-5

  1. Law of disposition मनोवृति का नियम-
    जिस कार्य में जैसे मनोवृति या अभिवृत्ति रहते हैं हम उसी अनुपात में सीखते हैं
  2. बहु अन्य क्रिया का नियम law of multiple response
    -हम किसी नए कार्य को करने के लिए अनेक प्रकार की अनुक्रिया करते हैं जिस अनुक्रिया से हमें लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद मिलती हैं उसे आगे ले जाते हैं और जिस अनुक्रिया से लक्ष्य को प्राप्त करने में मदद नहीं मिलती हैं उसे छोड़ देते हैं

3.आंशिक क्रिया का नियम low of particle activity-
समस्या को छोटे-छोटे भाग में तोड़ने पर समस्या आसान हो जाती है

  1. अनुरूपता का नियम/ सादृश्यता का नियम law of analogy –
    पूर्व अनुभव और प्रयत्न को स्मरण करना और वहां से समाधान खोजना

5.संबंधित परिवर्तन का नियम या साहचर्य का नियम law of associative shifting-
इसमें क्रिया का स्वरूप तो वही रहता है लेकिन परिस्थिति बदल जाती है

Notes by Ravi kushwah 😇

🌸 थार्नडाइक के मुख्य / गौण अधिनियम के नियम🌸

अधिगम के नियम-जीव, जंतु ,पशु ,पक्षी ,मानव सभी प्रकृति के किसी ने किसी नियम के अनुसार जीवन व्यतीत कर रहे हैं।

सीखने की प्रक्रिया भी इसी तरह नियमों के हिसाब से चलती है सीखने का प्रमुख नियम 3 हैं

1-तत्परता का नियम-जब हम किसी कार्य को करने के लिए तत्पर होते हैं तो उसे शीघ्र सीख लेते हैं समस्या को हल करने के लिए प्रयत्नशील होना तत्परता है।

2-अभ्यास का नियम-अभ्यास कुशल बनाता है यदि हम किसी कार्य का अभ्यास करते हैं तो उससे सरलता पूर्वक सीख जाते हैं तो उसमें कुशल हो जाते हैं अगर हम सीखे हुए कार्यों का अभ्यास नहीं करते हैं तो उसे भूल जाते हैं।

अभ्यास से सीखना स्थाई हो जाता है इसे उपयोग का नियम कहते हैं बिना अभ्यास के ज्ञान विस्तृत हो जाता है इसे अनुप्रयोग का नियम कहते हैं।

सीखने के गौण नियम 5 है

1-मनोवृत्ति का नियम-जिस कार्य में किसी मनोवृति या अभिवृत्ति रहती है हम उसे अनुमान से सीखते हैं।

2-बहु अनुक्रिया का नियम-इसलिए हम के अनुसार जब व्यक्ति के सामने कोई भी समस्या आती है तो वह उसे सुलझाने के लिए अनेक प्रकार की अनुक्रिया करते हैं और इन अनु क्रियाओं को करने का क्रम तब तक चलता रहता है जब तक वह सही अनुक्रिया का रूप में समस्या का समाधान नहीं कर लेता है इस प्रकार अपनी समस्या को सुलझा ने पर व्यक्ति संतोष का अनुभव करता है।

3-आंशिक क्रिया का नियम-इस नियम के अनुसार किसी कार्य को अंशत: विभाजित करके किया जाता है तो वह शीघ्रता से सीखा जा सकता है।

4-अनुरूपता का नियम-इस नियम का आधार पूर्व अनुभव है प्राणी किसी नवीन परिस्थिति या समस्या के उपस्थित होने पर उससे मिलती-जुलती अनेक परिस्थितियों यह समस्या का स्मरण करता है जिससे वह पहले भी अनुभव कर चुका है वह उसके प्रति वैसा ही प्रतिक्रिया करेगा जैसा कि उसने पहली परिस्थिति एवं समस्या के साथ की थी।

5-संबंधित परिवर्तन का नियम या साहचर्य का नियम-क्रिया का स्वरूप वही रहता है पर स्थिति बदल जाती है।

✍🏻📚📚 Notes by….. Sakshi Sharma✍🏻

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