📖 📖 शिक्षा को प्रभावित करने वाले कारक 📖 📖

ऐसे कारक जो किसी ना किसी रूप में बालक की शिक्षा को प्रभावित करते हैं। वह उसके द्वारा किए गए कार्यों में या तो अपना सहयोग देते हैं, या बाधा उत्पन्न करते हैं। वह सभी शिक्षा को प्रभावित करने वाले कारकों के अंतर्गत आते हैं।

ऐसे कारक हो जो बच्चे को सीखने में प्रभावित करते हैं। उन्हें दो प्रकार से वर्गीकृत किया जा सकता है, जो कि निम्नलिखित हैं ~
● व्यक्तिगत कारक,
● पर्यावरणीय कारक / वातावरणीय कारक।

यही दो कारण बालक को सीखने में या तो योगदान देते हैं। और यही कारक बच्चो के अधिगम में बाधा भी उत्पन्न कर सकते हैं। इन कारकों का वर्णन निम्नलिखित तथ्यों के द्वारा हम कर सकते हैं~

🌺 🌿 🌺 व्यक्तिगत कारक 🌺 🌿 🌺

जब बच्चा किसी कार्य को करता है या किसी कार्य को सीखता है। तो उस कार्य में उसके स्वयं के द्वारा कई प्रकार के कारक होते हैं। जो बाधा उत्पन्न करते हैं, या उस में सहयोग देते हैं। ऐसे कारकों को ही व्यक्तिगत कारक के अंतर्गत रखा जाता है। जिनका वर्णन निम्नलिखित तथ्यों के माध्यम से किया गया है~

🍃🍂 प्रेरणा में कमी~
एक व्यक्ति या बच्चे के सीखने में अभिप्रेरणा का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। क्योंकि बालक अगर प्रेरित नहीं होगा, तो वह सीखने में कई प्रकार की कठिनाइयों को महसूस कर सकता है। लेकिन वही बालक अगर किसी कार्य को करने के लिए प्रेरित होगा। तो वह हजारों कठिनाइयां आने के पश्चात भी अपने कार्यों में बाधा उत्पन्न नहीं होने देगा। अतः सीखने की क्रिया में अभिप्रेरणा की कमी किसी भी प्रकार से नहीं होनी चाहिए।

🍂🍃 रूचि में कमी~
जिस प्रकार से बच्चे के सीखने में प्रेरणा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। ठीक उसी प्रकार से रुचि भी बच्चे के सीखने में अपना महत्वपूर्ण योगदान देती है। जिस कार्य के प्रति बच्चों को करने में रूचि होती है वह कार्य है। निश्चित ही पूर्ण रूप से उत्साहित होकर संपन्न करेंगे, लेकिन उसी के विपरीत जिस कार्य को करने में बच्चे की रुचि नहीं होती है। वह उस कार्य को नहीं कर पाएगा इसीलिए हमें बच्चों को जिस प्रकार के भी कार्य करवाए जाने चाहिए। उनमें हमें रुचि उत्पन्न करना अति आवश्यक है। तभी हम बच्चे का सीखने के प्रति ध्यान आकर्षित कर पाएंगे।

🍃🍂 आत्मविश्वास में कमी~
एक बच्चे के शिक्षण प्रक्रिया करने के अंतर्गत या किसी भी प्रकार के कार्य को करने के लिए आत्मविश्वास का होना बहुत ही अति आवश्यक है। क्योंकि बिना आत्मविश्वास के संसार में कोई भी व्यक्ति किसी भी कार्य को करने के लिए उत्साहित नहीं रहता है, क्योंकि अगर बच्चे में आत्मविश्वास की कमी हो जाएगी। उसे स्वयं के ऊपर ही विश्वास नहीं रहेगा, कि मैं इस कार्य को कर पाऊंगा। तो निश्चित ही वह बालक उस कार्य को नहीं कर पाएगा। किसी भी कार्य को करने के लिए आत्मविश्वास का होना जरूरी होता है।

🍂🍃 शारीरिक अंग एवं तत्व ~
हम सभी यह भली-भांति जानते हैं, कि अगर हम किसी कार्य को करना चाहते हैं। तो उसके लिए हमें शारीरिक एवं मानसिक रूप से तत्पर रहना अति आवश्यक होता है। अगर कोई व्यक्ति शारीरिक रूप से पीड़ित है, तो वह कार्यों को करने में असमर्थ रहेगा। कई बार बच्चे उदास होते हैं, एवं अत्यधिक कार्य करने से वह थकान भी महसूस करते हैं, जिससे कि उनका शारीरिक व मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है। और वह कार्यों को नहीं कर पाते हैं। तो बच्चे के सीखने में शारीरिक अंगों एवं तत्वों का भी उचित रहना आवश्यक है। यह भी उसे प्रभावित करते हैं।

🍃🍂 उम्र एवं परिपक्वता~
बच्चे की सीखने की प्रक्रिया में आयु एवं परिपक्वता प्रत्यक्ष रूप से अपना योगदान देती है, क्योंकि हम सभी जानते हैं, कि किसी भी कार्य को करने के लिए एक आयु सीमा होती है। एवं उस आयु सीमा में हमें उम्र के आधार पर परिपक्वता भी प्राप्त हो जाती है। उचित आयु एवं परिपक्वता के चलते ही मानव का सर्वागीण विकास हो पाता है। समय से पूर्व एवं समय के पश्चात कार्यों को करने व समझने में कई बार परिस्थितियां अनुकूलित नहीं रहती है। अतः हम कह सकते हैं, कि उम्र एवं परिपक्वता भी बच्चे के सीखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

🍂🍃 किसी चीज या व्यक्ति के प्रति संवेदना व धारणा~
जब बालक किसी वस्तु या व्यक्ति के प्रति अपने विचार प्रस्तुत करता है। तो वह किसी आधार पर यह विचार प्रस्तुत करता है। इन आधारों को कई बार धारणा का रूप दे देता है। वह किसी वस्तु के प्रति अपनी धारणा बना लेता है कि यह वस्तु उचित नहीं है, या यह वस्तु उचित है। इस प्रकार की धारणाएं भी बच्चे के सीखने में महत्वपूर्ण योगदान देती हैं। एवं बच्चे के सीखने में उसकी संवेदनाएं व ज्ञानेंद्रियों का भी योगदान होता है। बच्चा अपनी ज्ञानेंद्रियों के माध्यम से भी अपने वातावरण को पहचानता है, या वह विषय वस्तु को। जो कि उसके सीखने में सहायक है। वह उसमें भी अपनी इंद्रियों एवं धारणाओं को संबंधित रखता है।

🍃🍂 करके सीखने की योग्यता~
जब बच्चा किसी कार्य को होते हुए देखता है। एवं उसी कार्य को वह अपने द्वारा करता है। तो उसे विषय वस्तु का ज्ञान स्थाई रूप से प्राप्त हो जाता है। वह उस किए गए कार्य में आगे करने मे किसी भी प्रकार की त्रुटियों को नहीं करता है। अतः बच्चे के सीखने में स्वयं के द्वारा करके सीखना अति आवश्यक भूमिका निभाता है। बच्चा अपने जीवन में किसी भी प्रकार के कार्य को वह स्वयं से करेगा। तो उसका अनुभव उसे जीवन पर्यंत रहेगा। वह उस कार्य को कभी भूल नहीं सकता है। अतः हमें बच्चे को जो भी कार्य कराए जाने चाहिए। वह तो एवं उसके द्वारा ही कराना होगा।

🌻 🌿 🌻 पर्यावरणीय कारक 🌻 🌿 🌻

ऐसे कारक जो बच्चे के सीखने में अपना योगदान देते हैं, लेकिन अगर परिस्थितियां विपरीत हो जाए तो वह बच्चे के सीखने में बाधा भी उत्पन्न करते हैं। जो कि उसके आसपास के वातावरण या पर्यावरण से जुड़े हुए होते हैं। उन कारकों को पर्यावरणीय कारक या वातावरणीय कारक के अंतर्गत रखा जाता है~

🍂🍃 शिक्षक, माता-पिता एवं मित्र~
बच्चे की शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षक माता-पिता एवं उसके संगी-साथी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। क्योंकि बच्चा सबसे अधिक अपने माता-पिता के संपर्क में ही रहता है। अगर माता-पिता का आपसी संबंध यह व्यवहार उचित होगा। तो उसका प्रभाव बच्चे के सीखने की प्रक्रिया में भी पड़ेगा। ठीक अगर उसके विपरीत हम माता-पिता अनुचित व्यवहार करेंगे तो उसका भी प्रभाव बच्चे के ऊपर पड़ेगा। एवं परिवार के पश्चात बालक अपने शिक्षक एवं मित्रों के संपर्क में आता है। अतः उनका भी बच्चे के जीवन में महत्वपूर्ण योगदान रहता है। शिक्षक का अनुकरण बच्चा करता है। अतः शिक्षण कराते समय शिक्षक को उचित व्यवहार व तकनीकों का प्रयोग किया जाना चाहिए। क्योंकि शिक्षक हमेशा आदर्श व्यापार करता है, और उसी का अनुकरण बच्चा करता है। इसमें मित्रों का भी महत्वपूर्ण सहयोग रहता है। और उनका व्यवहार भी बच्चे के जीवन में योगदान देता है।

🍃🍂 प्राकृतिक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक वातावरण~
बच्चा की शिक्षण प्रक्रिया में बाहरी कारकों का महत्वपूर्ण योगदान रहता है। क्योंकि जितना बालक अपने परिवार से सीखता है। उतना ही वह बाहरी दुनिया से भी सीखता है। जिस प्रकार का व्यवहार उसके सामाजिक क्षेत्र में किया जाता है। वह भी उसी प्रकार का व्यवहार करेगा। बालक की सामाजिक एवं सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से ही हम यह ज्ञात कर सकते हैं, कि बालक सीखने में किस प्रकार से तत्पर है। अतः बच्चे की सामाजिक स्थिति, सांस्कृतिक स्थिति एवं प्राकृतिक स्थिति उसके अनुकूल होने चाहिए। अगर परिस्थितियां प्रतिकूल होंगी तो वह उसके सीखने में बाधा उत्पन्न करेगी।

🍂🍃 मीडिया एवं संचार का प्रभाव~
इस बात से हम सभी भलीभांति परिचित हैं, कि आज के समय में मीडिया एवं संचार का कितना उपयोग किया जा रहा है। प्रत्येक व्यक्ति पूर्ण रूप से संचार के माध्यमों पर ही निर्भर है। इसी से प्रभावित होकर बच्चे भी इनका उपयोग करने से वंचित नहीं है, मीडिया के माध्यम से हमें कई प्रकार की जानकारियां प्राप्त होती है। हम उन सूचनाओं का आदान प्रदान करते हैं। अतः बच्चा भी इन सभी से बहुत कुछ सीख सकता है। ठीक इसी के विपरीत अगर बच्चा इनका अनुचित उपयोग करें, तो उसका बच्चे के जीवन पर भी गलत प्रभाव पड़ेगा। अतः बच्चे की सीखने की प्रक्रिया में मीडिया एवं संचार का भी महत्वपूर्ण योगदान रहता है।

उपर्युक्त सभी सभी तथ्य बच्चे के सीखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बच्चा इनसे पूर्ण रूप से प्रभावित होता है। अतः हमें इन सभी तथ्यों को बच्चों के अनुकूल करना होगा। इनके प्रतिकूल परिस्थितियां होने पर बच्चे का सर्वांगीण विकास नहीं होगा। उसके विकास में कई प्रकार की बाधाएं उत्पन्न होगी।

📚 📚 📕 समाप्त 📕 📚 📚

✍🏻 PRIYANKA AHIRWAR ✍🏻

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🌀 *शिक्षा को प्रभावित करने वाले कारक*🌀 ऐसे कारक जो हमारे शिक्षा को प्रभावित करते है या बच्चों की शिक्षा में बाधा डालते हैं जो कि निम्नलिखित है ☑️ *व्यक्तिगत कारक* ➖ व्यक्तिगत कारक म यह कह सकते हैं कि इसमें बच्चे की खुद की या किसी की भी स्वयं की समस्या होती है जिस कारण से वह शिक्षा में शिक्षा में बाधा उत्पन्न करता है ▪️ *प्रेरणा की कमी* ➖ इसमें बच्चे को सही मार्गदर्शन ना मिल पाने के कारण भी प्रेरणा में कमी आती है कभी-कभी वह अपने काम के प्रति प्रेरित नहीं होता है या तात्कालिक , पारिवारिक किसी कारण किसी भी समस्या के कारण वह प्रेरित नहीं होता है जिस कारण से वह शिक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करता हैं। ▪️ *रुचि में कमी* ➖ जब जब बच्चे किसी काम में रुचि नहीं लेते हैं या किसी भी समस्या के कारण अपने कार्य को या शिक्षण प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाते हैं ▪️ *आत्मविश्वास में कमी*➖ कई बार क्या होता है कि जब हम कोई लक्ष्य बनाते हैं तो हमारे मन में तर्क वितर्क चलता है हम इस कार्य को कर सकते हैं या नहीं यह कार्य कैसे होगा कैसे करेंगे इस प्रकार के कई प्रश्न हमारे मन में चलते हैं अगर किसी कारण बस हम फेल कर गए तो हमारे विश्वास में कमी आ जाती है ▪️ *उदासी*➖ हमारे परिवार में या हमारे आसपास या व्यक्तिगत किसी भी प्रकार की शारीरिक बीमारी हो जाने के कारण हम कभी-कभी उदासी महसूस करते हैं या जैसे किसी कार्य के लिए घर से निकलते हैं कोई कुछ बोल दिया तो हम यह धारणा बना लेते हैं कि इसकी वजह से आज हमारा काम नहीं हुआ और उदास हो जाते हैं ▪️ *थकान*➖ जब कभी हमारे ऊपर अतिरिक्त भार दे दिया जाता है या काम करते-करते बच्चे थक जाते हैं तो वह थकान का लचीलापन का अनुभव करते हैं ▪️ *उम्र और परिपक्वता*➖ कभी-कभी क्या होता है कि कुछ बच्चे उम्र से पहले या यह कह सकते हैं कि समय से पहले वह परिपक्व हो जाते हैं तो काफी जटिलताओं का अनुभव करते हैं बच्चे का उम्र से पहले परिपक्वता आ जाना भी एक प्रकार से शिक्षा को प्रभावित करने वाला कारक है क्योंकि जिस समय में जो कार्य करना चाहिए अगर वह उस समय में नहीं होता है तो वह हमारे कार्य को फिर प्रभावित करता है ▪️ *किसी चीज के प्रति धारणा*➖ बच्चों के मन में कभी-कभी गलत धारणाएं बैठ जाती हैं किसी चीज के प्रति जो कि उनको आगे बढ़ने से रोकती है ▪️ *भावनात्मक स्थिति*➖ उपयुक्त वातावरण ना होने के कारण आपस में परिवार में विवाद होने के कारण बहुत खुशी एवं किसी भी दुख के कारण भावनात्मक स्थिति कभी-कभी खराब हो जाती है जो कि शिक्षा में बहुत ज्यादा प्रभाव डालती है ▪️ *करके सीखना*➖ जब बच्चा कभी किसी चीज को अपने से करता है तो हो सकता है कि वह उस कार्य को करने में सफल ना हो जिससे वह प्रभावित होता है आगे उस कार्य को करने में या असफलता के कारण उसको डर बन जाता है जो कि उसके शिक्षा को प्रभावित करता है ▪️ *किसी तथ्य के प्रति रवैया*➖ किसी घटना या तथ्य के हो जाने के कारण बच्चा कभी-कभी अच्छा व्यवहार या रवैया नहीं दिखाता है या उसका सही तरीके से व्यवहार नहीं रहता है जो कि उसकी शिक्षा प्रक्रिया में बाधा डालता हैं। 🔆 *शिक्षा को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारक*🔅 ▪️ *शिक्षक ,साथी और माता-पिता*➖ शिक्षक साथी और माता-पिता इनके साथ संबंध और सहयोग एक बच्चे को तनाव मुक्त वातावरण और उसके विकास की सुविधा प्रदान करता है ▪️ *परिवेश ( प्राकृतिक सांस्कृतिक सामाजिक* ➖ यह सभी स्थितियां शिक्षा को सीधे प्रभावित करती है परिवेश बच्चे के विकास और स्थिति के अनुकूल होना चाहिए। ▪️ *मीडिया प्रभाव* ➖ जानकारी आदान प्रदान करने का प्रमुख स्रोत है इसलिए यह कारक शिक्षा की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए जिम्मेदार है । धन्यवाद 🙏

✍️ बाय प्रज्ञा शुक्ला

📚📒 शिक्षा को प्रभावित करने वाले कारक ( factors Effecting to learning)📚📒

💫 ऐसे कारक जो हमारी शिक्षा को प्रभावित करते हैं या बच्चों की शिक्षा में बाधा डालते हैं यह कारक निम्न हो सकते हैं-

💠 व्यक्तिगत कारक➖
व्यक्तिगत कारक में यह कह सकते हैं कि इसमें बच्चे की खुद की या किसी की भी स्वयं की समस्या होती है जिस कारण से वह शिक्षा में बाधा उत्पन्न करता है।

💫 प्रेरणा की कमी ➖
इसमें बच्चे को सही मार्गदर्शन ना मिल पाने के कारण भी प्रेरणा में कमी आती है कभी-कभी वह अपने काम के प्रति प्रेरित नहीं होता है या परिवारिक इसी कारण किसी समस्या के कारण वह प्रेरित नहीं होता है जिस कारण से वह शिक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करता है।

💫 रुचि की कमी ➖
जब बच्चे किसी भी काम में रुचि नहीं लेते हैं या किसी भी समस्या के कारण अपने काम को या शिक्षण प्रक्रिया को पूरा नहीं कर पाते हैं जब बच्चे की किसी कार्य के प्रति रुचि नहीं होती तो वह सीख भी नहीं सकते हैं और ना ही बेहतर प्रदर्शन कर पाते हैं रुचि बच्चों के शिक्षण को प्रभावित करती है।

💫 आत्मविश्वास की कमी ➖
कई बार ऐसा होता है कि जब हम कोई लक्ष्य बनाते हैं तो हमारे मन में तर्क वितर्क चलता रहता है हम ऐसे कार्य को कर सकते हैं या इस कार्य को नहीं कर सकते यह कार्य कैसे होगा कैसे करेंगे इस प्रकार के कई प्रश्न हमारे मन में चलते रहते हैं अगर किसी कारण बस हम उस कार्य को करने में असफल हो जाते हैं तो हमारा विश्वास भी कम हो जाता है यानी हमारे आत्मविश्वास में कमी आ जाती है।

💫 उदासी ➖
हमारे परिवार में या हमारे आसपास या व्यक्तिगत किसी भी प्रकार की शारीरिक बीमारी हो जाने के कारण हम कभी कभी उदासी महसूस करते हैं या जैसे किसी कार्य के लिए घर से निकलते हैं कोई कुछ बोल दिया तो हम यह धारणा बना लेते हैं कि इसकी वजह से आज हमारा काम नहीं हुआ और हम उदास हो जाते हैं।

💫 थकान ➖
जब कभी हमारे ऊपर अतिरिक्त भार दे दिया जाता है या काम करते-करते बच्चे थक जाते हैं तो वह थकान का लचीलापन महसूस या अनुभव करते हैं।

💫 उम्र और परिपक्वता ➖
कभी-कभी क्या होता है कि कुछ बच्चे उम्र से पहले या यह कह सकते हैं की समय से पहले वह परिपक्व हो जाते हैं तो काफी जटिलताओं का अनुभव करते हैं बच्चे का उम्र से पहले परिपक्वता आ जाना भी एक प्रकार से शिक्षा को प्रभावित करने वाला कारक है क्योंकि जिस समय में जो कार्य करना चाहिए अगर वह उस समय में नहीं होता है तो वह हमारे कार्य को प्रभावित करता है।

💫 किसी चीज़ के प्रति धारणा ➖
बच्चों के मन में कभी-कभी गलत धारणाएं बैठ जाती है किसी चीज के प्रति जोकि उनको आगे बढ़ने से रोकती हैं।

💫 भावात्मक स्थिति ➖
उपर्युक्त वातावरण ना होने के कारण आपस में परिवार में विवाद होने के कारण बहुत खुशी एवं किसी भी दुख के कारण भावनात्मक स्थिति कभी-कभी खराब हो जाती है जो कि शिक्षा में बहुत ज्यादा प्रभाव डालती है।

💫करके सीखना ➖
जब बच्चा कभी किसी चीज को अपने से करता है तो हो सकता है कि वह उस कार्य को करने में सफल ना हो जिससे वह प्रभावित होता है आगे उस कार्य को करने में या असफलता के कारण उसको डर बन जाता है जोकि उसकी शिक्षा को प्रभावित करता है।

💫 किसी तथ्य के प्रति रवैया ➖
किसी घटना या तथ्य के हो जाने के कारण बच्चा कभी-कभी अच्छा व्यवहार या रवैया नहीं दिखाता है या उसका सही तरीके से व्यवहार नहीं रहता है जोकि उसकी शिक्षा प्रक्रिया में बाधा डालता है।

🔰 शिक्षा को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारक🔰

💫 शिक्षक,साथी और माता-पिता➖
शिक्षक साथी और माता पिता इनके साथ संबंध और सहयोग एक बच्चे को तनाव मुक्त वातावरण और उसके विकास की सुविधा प्रदान करता है।

💫 परिवेश (प्राकृतिक सांस्कृतिक सामाजिक कारक➖
यह सभी स्थितियां शिक्षा को सीधे प्रभावित करती हैं परिवेश बच्चे के विकास और स्थिति के अनुकूल होना चाहिए।

💫 मीडिया का प्रभाव ➖
जानकारी आदान प्रदान करने का प्रमुख स्रोत है इसलिए यह कारक शिक्षा की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए जिम्मेदार है।

📝 Notes by ➖
✍️ Gudiya Chaudhary

🔆 *शिक्षा को प्रभावित करने वाले कारक*
बच्चों को शिक्षा के रूप में प्रभावित करने वाले कारक बहुत हो सकते हैं जैसे में बच्चे के किए गए कार्य में सहयोग देना या बाधा उत्पन्न करना यह सब है शिक्षा को प्रभावित करने के कारक में ही आएंगे।

ऐसे कारक जो बच्चे को सीखने में प्रभावित करता है उन्हें जो प्रकार से बताया गया है जोकि निम्नलिखित हैं।
⚜️ व्यक्तिगत कारक
⚜️ पर्यावरणीय कारक या वातावरणीय कारक ।
ये सभी तथ्य हैं जो बच्चे को शिक्षा में प्रभावित करते हैं जो कि निम्नलिखित हैं।

💐 *व्यक्तिगत कारक*
ऐसे कार्य जो बच्चों के कार्य में बाधा उत्पन्न होते हैं या उनसे उनको सहयोग मिलता है ऐसे कारक व्यक्तिगत कारक के अंतर्गत आते हैं जिसका वर्णन नीचे दिया गया है।

⚜️ प्रेरणा की कमी
एक बच्चे के सीखने में अभिप्रेरणा का महत्वपूर्ण योगदान होता है बालक अगर अभी प्रेरित नहीं होगा तो उसे सीखने में कई कठिनाइयों का महसूस करता है लेकिन अगर वही कार्य को सीखने में रुचि लेता है या प्रेरित होता है तो कितनी भी कठिनाई आती हैं और कितनी भी बघाए होने के बावजूद भी वह क्रिया को सीखने में अभिप्रेरणा की कमी किसी भी प्रकार से नहीं होती है।

⚜️ रुचि में कमी
जिस प्रकार से बच्चे के सीखने में प्रेरणा या रुचि का महत्वपूर्ण भूमिका होती है ठीक उसी प्रकार से बच्चे के सीखने में रुचि का भी बहुत महत्वपूर्ण योगदान होता है अगर बच्चे किसी कार्य के प्रति रुचि होते हैं तो वह कार्य जल्दी सीख जाते हैं अगर वह किसी कार्य को करने में रुचि नहीं होते हैं उन्हें व कठिन लगता है और उन्हें सीखने में भी समय लगता है लेकिन हमें बच्चों से कार्य करवाना चाहिए उनमें रुचि उत्पन्न करवाना अति आवश्यक है हमें बच्चे के सीखने के लिए ध्यान आकर्षित करना चाहिए जिससे वह सीखे।

⚜️ आत्मविश्वास में कमी
बच्चे अगर कोई कार्य करते हैं तो उन्हें आत्मविश्वास की कमी नहीं होनी चाहिए अगर आत्मविश्वास की कमी होती है उनमें वह किसी कार्य को नहीं कर पाते हैं क्योंकि किसी भी कार्य को करने के लिए आत्मविश्वास का होना बहुत ही आवश्यक होता है आत्मविश्वास के बिना कोई भी व्यक्ति किसी कार्य को करने के लिए उत्साहित नहीं रहता है अगर बच्चे में आत्मविश्वास की कमी आ जाएगी तो उसे स्वयं से ऊपर की विश्वास से ही हट जाता है जिससे वह कार्य को नहीं कर पाते हैं तो हमें उन बालक को उस कार्य को करने लिए उत्साहित करना चाहिए जिससे वह कार्य को करने के लिए उनमें आत्मविश्वास जागरूक हो।

⚜️ उदासी एवं थकान
जब बच्चे कार्य करते हैं तो उन्हें शारीरिक व मानसिक रूप से तैयार रहना आवश्यक होता है अगर कोई व्यक्ति या बच्चे शारीरिक रूप से पीड़ित है यहां उन्हें कोई बीमारी है तो वह उस कार्य को करने में असमर्थ होते हैं और इससे वजह से कई बार बच्चे उदास हो जाते हैं और अत्यधिक कार्य करने में और थकान भी महसूस करते हैं जिससे कि उनका शारीरिक व मानसिक संतुलन बिगड़ जाता है और वह कार्य को नहीं कर पाते हैं बच्चे के सीखने में यदि उस कार्य को करने में प्रभावित करते हैं जैसे कोई बच्चे को कोई परेशानी होती है तो वह उतना काम नहीं कर पाते हैं जितना उन्हें करना चाहिए।

⚜️ उम्र और परिपक्वता
बच्चे जब कोई कार्य करते हैं तो उसे सीखने की प्रक्रिया में आए हुए एवं परिपक्वता प्रत्यक्ष रूप से योगदान देती है क्योंकि हम जानते हैं कि किसी भी कार्य करने के लिए आयु सीमा होती है उससे सीमा में हम रहकर ही उम्र के आधार पर ही करते हैं जैसे जैसे हमारी उम्र बढ़ती है बालक में परिपक्वता भी प्राप्त होती है उचित और अनुचित का भी बालक को ज्ञान होता है आयु एवं परिपक्वता के चलते ही मानव का सर्वागीण विकास हो पाता है समय से पूर्व एवं समय के पश्चात कार्यों को करने व समझने के कई बार परिस्थितियां अनुकूल रहती है तो हम कह सकते हैं कि उम्र एवं परिपक्वता भी बच्चे के सीखने में महत्वपूर्ण भूमिका होती है उम्र के पहले अगर कोई कार्य सीख जाते हैं वह भी हानिकारक है और उम्र के बाद भी सीखते हैं तो वह भी हानिकारक है। जैसे बड़े होते हैं बातों को समझने लगते हैं।

⚜️ किसी चीज के प्रति संवेदना और धारणा—
जब कोई व्यक्ति या बालक के किसी वस्तु या व्यक्ति के प्रति अपने विचार प्रस्तुत करते हैं तो वह आधार या विचार प्रस्तुत कर पाते हैं किसी वस्तु के प्रति अपना धारणा बना लेते हैं जो कि उचित और अनुचित दोनों होता है यह वस्तु उचित भी होता है और अनुचित भी होता है और यह सब धारणाएं बच्चे के सीखने में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान देती है बच्चे के सीखने में उसकी संवेदनाएं और ज्ञान इंद्रियों का भी विकास होता है वह अपनी इंद्रियों के माध्यम से ही अपने वातावरण को पहचानते हैं जो कि सीखने में सहायक होता है।

⚜️ भावनात्मक स्थिति
बच्चों के उपयुक्त वातावरण ना होने के कारण उन्हें अपने परिवार में वाद विवाद होने कारण बहुत खुशी एवं किसी भी दुख के कारण भावनात्मक स्थिति कभी कभी खराब हो जाती है जो कि शिक्षा में बहुत तेज ज्यादा प्रभाव डालती है जैसे घर में कोई माता-पिता के बीच में झगड़ा ही हो या पास हो जिससे बच्चों पर भावनात्मक स्थिति खराब होती हैं।

⚜️ करके सीखने की योग्यता
बालक किसी कार्य को करते हुए देखते हैं तो वह उसी कार्य को स्वयं के द्वारा करना चाहते हैं जिससे उनमें ज्ञान स्थाई रूप से प्राप्त हो जाता है वह उस कार्य को आगे भी करना चाहते हैं और उस कार्य में त्रुटि नहीं करना चाहते हैं बच्चे स्वयं के द्वारा करके सीखते हैं जो कि उनके लिए बहुत ही आवश्यक भूमिका निभाते हैं बच्चा अपने जीवन में किसी भी प्रकार के कार्य को स्वयं करना चाहते हैं जिससे उनका अनुभव भी बढ़ता है जिसे वह अपने आगे जीवन में प्राप्त याद रखते हैं और वह उस कार्य को कभी नहीं भूल सकते जो बच्चे स्वयं से कार्य करते हैं इसलिए हमें बच्चे को खुद से स्वयं कार्य करवाना चाहिए जिससे वह उसके द्वारा सीख सकें।

🔆 *शिक्षा को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारक* जो बच्चे के सीखने में योगदान देते हैं लेकिन किसी परिस्थिति के कारण होते हैं उन्हें सीखने में बाधा उत्पन्न होती है जो कि उनके आसपास के वातावरण या पर्यावरण से जुड़े होते हैं उन कारणों को पर्यावरणीय कारक या वातावरणीय कारक के अंतर्गत आते हैं।

⚜️ शिक्षक ,साथी और माता-पिता— बच्चे की शिक्षण प्रक्रिया में शिक्षक साथी और माता-पिता का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है क्योंकि बच्चा सबसे ज्यादा अपने माता-पिता के संपर्क में ही रहते हैं क्योंकि उनका सबसे ज्यादा अपने माता पिता के साथ ही बिताते हैं और माता-पिता भी बच्चे को अच्छे से जानते हैं क्योंकि उनका ज्यादा समय उन्हीं के साथ गुजरता है माता-पिता बच्चे को आपसी संबंध भी सिखाते हैं कि किसके साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए तो उस पर उनका प्रभाव बच्चे के सीखने की प्रक्रिया में भी पड़ता है ठीक उसी तरह है जब वे माता-पिता का विपरित अनुचित व्यवहार करते हैं तो उसका प्रभाव बच्चे के ऊपर पड़ता है परिवार के बाद माता-पिता शिक्षक एवं मित्रों के साथ ज्यादा समय बिताते हैं जो कि उनके जीवन में बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान रहता है शिक्षक का अनुकरण करते हैं जैसे-जैसे शिक्षा के उचित व्यवहार व तकनीकों का प्रयोग करना सिखाते हैं या करते हैं उसी से बच्चों का अनुकरण करके सीखते हैं क्योंकि शिक्षा का आदर्श व्यव्हार करते हैं और उसी तरह बच्चा भी करते हैं मित्र का भी महत्वपूर्ण योगदान रहता है और उनका व्यवहार बच्चे की जीवन में बहुत योगदान देता है और बहुत ही आवश्यक है जो कि उन्हें विकास की सुविधा प्रदान करता है ।

⚜️ परिवेश ( प्राकृतिक सांस्कृतिक सामाजिक)—
बच्चे की शिक्षा ने प्रक्रिया में बाहरी कारकों का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है जितना बालक अपने परिवार मित्र और शिक्षक से सीखता है उतना ही वह अपने बाहरी दुनिया से भी सीखता है जिस प्रकार से व्यवहार देखने को मिलता है वह उसके सामाजिक क्षेत्र में किया जाता है वह उसी प्रकार का व्यवहार भी करता है बालको को सामाजिक एवं सांस्कृतिक के स्थिति एवं प्रकृति की स्थिति उनके अनुकूल होना चाहिए स्थितियां अनुकूल होंगी तो उनके सीखने में बाधा उत्पन्न भी करती है।

⚜️ मीडिया प्रधान
यह हम अच्छे से जानते हैं कि आज के समय में मीडिया एवं संचार कितना योगदान देता है बच्चों के सीखने में प्रत्येक व्यक्ति पूर्ण रूप से संचार माध्यमों पर ही निर्भर रहते हैं इससे बच्चे में इसका उपयोग करने से भी वंचित नहीं है क्योंकि मीडिया के माध्यम से ही हमें कई प्रकार की जानकारियां भी प्राप्त होती है सूचनाएं भी मिलती है जो कि हम आदान-प्रदान भी करते हैं बच्चा इन्हीं सब से बहुत कुछ सीख सकते हैं अगर उसका अच्छी तरीके से उन्हें अनुचित उपयोग किया जाए तो उसके जीवन भर भी गलत प्रभाव नहीं पड़ेगा अगर वह अनुचित उपयोग करेंगे तो उसका गलत ही प्रभाव पड़ सकता है इसलिए बच्चे को सीखने की प्रक्रिया में मीडिया एंड संचार का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है
बच्चे के सीखने में सभी चीजें बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान निभाते हैं इन सभी तथ्यों से बच्चे सीखते ही हैं जिससे उनका सर्वागीण विकास से हो पाता हैं इसलिए यह सभी कार्य शिक्षा की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए जिम्मेदार होते हैं।

Noted By:-Neha Roy 🙏🙏🙏🙏🙏🙏➡️

शिक्षा को प्रभावित करने वाले कारक

ऐसे कारक जो बालक की अधिगम प्रक्रिया को किसी न किसी रूप से प्रभावित करते हैं शिक्षा को प्रभावित करने वाले कारक कहलाते हैं

शिक्षा को प्रभावित करने वाला व्यक्तिगत कारक

ऐसा कारक जो बालक के स्वयं के कारण किसी न किसी रूप से उसकी अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित करता है व्यक्तिगत कारक कहलाता है

शिक्षा को प्रभावित करने वाले व्यक्ति कारक निम्न है

प्रेरणा की कमी -जब हम किसी कार्य को करते हैं अगर उस कार्य को करने के लिए हमारा उत्साह अच्छा है तो हम उस कार्य को आसानी से कर सकते हैं लेकिन यदि उस कार्य को करने के लिए हमारे प्रेरणा और उत्साह अच्छा नहीं है या उसमें कमी है तो हम उस कार्य को आसानी से नहीं कर सकते हैं उसमें कुछ न कुछ बाधा उत्पन्न होती है

रूचि में कमी -यदि किसी कार्य में हमारी रुचि अच्छे होते हैं तो हम उस कार्य में अपना 100 प्रतिशत योगदान करते हैं और अपनी पूरी क्षमता से उस कार्य को करते हैं यदि किसी कार्य में हमारी रुचि नहीं होती है उस कार्य को हम अपनी क्षमता के अनुसार नहीं कर पाते हैं इस प्रकार रुचि बालक के अधिगम प्रक्रिया को प्रभावित करती है

आत्मविश्वास में कमी -यदि किसी कार्य को करते समय हमें खुद पर विश्वास नहीं होता है या हमें विफलता का डर होता है तो हम उस कार्य को अच्छे से नहीं कर पाते हैं यदि कार्य में हम हमारा आत्मविश्वास अच्छा है तो हम उस कार्य को बेहतर ढंग से कर पाते हैं

उदासी -यदि हम किसी कारण वंश उदास होते हुए किसी कार्य को करते हैं तो उस कार्य को हम अच्छी प्रकार से नहीं कर पाते हैं अपना पूरा योगदान नहीं दे पाते है

थकान- यदि हमारा शरीर थका हुआ है और दिमाग बोल रहा है कि हमे उस कार्य को करना है लेकिन शरीर उस कार्य को करने में हमारा साथ नहीं दे पाता है और अब हम उसे अपनी क्षमता के अनुसार नहीं कर पाते हैं

उम्र और परिपक्वता -यदि हम अपनी उम्र से अधिक क्षमता का कार्य करते हैं तो उसे ठीक प्रकार से नहीं कर पाते या उसमें कुछ ना कुछ कारण से त्रुटियां रह जाती है ।

किसी चीज की संवेदना और धारणा- यदि हमारी धारणा/ संप्रत्यय किसी वस्तु के प्रति अच्छी नहीं बन पाती हैं तो हम उसके प्रति बेहतर प्रतिक्रिया नहीं कर पाते हैं।
जैसे किसी पब्लिकेशन की बुक मैं बहुत ज्यादा गलतियां होती हैं या उसका प्रस्तुतीकरण अच्छा नहीं होता है तो उसके बारे में हमारी यह धारणा बन जाती है और जब भी उस पब्लिकेशन से कोई अच्छी बुक आती है फिर भी हम उसे नहीं पढ़ते हैं क्योंकि उस पब्लिकेशन के प्रति हमारी धारणा गलत बनी हुई है

भावनात्मक स्थिति -यदि किसी कार्य के प्रति हमारी भावना है /हमारे इमोशन अच्छे नहीं है तो अब उस कार्य को ठीक प्रकार से नहीं कर पाते हैं।

करके सीखने की योग्यता -कहीं बालको में अनेक ऐसी प्रतिभा होती है जिसे वे बेहतर ढंग से कर सकते हैं लेकिन अपनी आलसी प्रवृति के कारण वह उस कार्य को करते नहीं और अपनी क्षमता का बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाते हैं

किसी तथ्य के प्रति रवैया- यदि हमारा शिक्षा के प्रति रवैया अच्छा नहीं है तो भी हम अच्छी प्रकार से अधिगम नहीं कर सकते हैं।

शिक्षा को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारक-

वह कारक जो बालक के अधिगम प्रक्रिया को जो बालक की व्यक्तिगत न होते हुए भी प्रभावित करती हैं पर्यावरणीय कारक कहलाते हैं

शिक्षक साथी और माता-पिता-
शिक्षक साथी और माता-पिता के साथ संबंध और सहयोग एक बच्चे को तनाव मुक्त वातावरण और उसके विकास की सुविधा प्रदान करता है क्योंकि ज्यादातर समय बालक इन सभी के साथ बिताता है

परिवेश ( प्राकृतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक)-
यह सभी स्थितियां शिक्षा को सीधे प्रभावित प्रभावित करते हैं प्रवेश बच्चे के विकास और स्थिति के अनुकूल होना चाहिए

मीडिया का प्रभाव-
जानकारी का आदान प्रदान करने का प्रमुख साधन मीडिया है यह बालक के अधिगम प्रक्रिया को बहुत प्रभावित करता है

इसलिए यह सभी कारक शिक्षा की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए जिम्मेदार है।

Notes by Ravi kushwah

💥 बच्चों की शिक्षा को प्रभावित करने वाले कारक💥

🌟 बच्चों की शिक्षा को प्रभावित करने वाले अनेक कारक हो सकते हैं।

🎄मुख्य रूप से बच्चों की शिक्षा को प्रभावित करने वाले दो कारक होते हैं जो कि निम्नलिखित हैं :-

1️⃣ शिक्षा को प्रभावित करने वाले व्यक्तिगत कारक।
2️⃣ शिक्षा को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारक।

1️⃣ शिक्षा को प्रभावित करने वाले व्यक्तिगत कारक :-
🔥ऐसी कार्य जो बच्चों के कार्य में बाधा उत्पन्न करते हैं तथा उनमें नकारात्मकता पैदा करते हैं। ऐसे कारक व्यक्तिगत कारक के अंतर्गत आते हैं।

🌳 व्यक्तिगत कारक के प्रकार :-
🔥व्यक्तिगत कारक अनेक प्रकार के हो सकते हैं। जिसमें से कुछ कारकों को निम्नलिखित रूप में दर्शाया जा रहा है :-

💥प्रेरणा की कमी
💥 रुचि में कमी
💥आत्मविश्वास में कमी
💥उदासी एवं थकान
💥उम्र और परिपक्वता
💥किसी चीज के प्रति संवेदना और धारणा
💥भावनात्मक स्थिति
💥करके सीखने की योग्यता

💥प्रेरणा की कमी :-
🌸किसी भी बच्चे या व्यक्ति विशेष को किसी कार्य को सीखने या करने के लिए अभिप्रेरणा का बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है अगर हमारे अंदर किसी कार्य को करने के लिए अभिप्रेरणा और रुचि नहीं होगी तो हम प्रेरित नहीं होंगे और हमें आसान कार्य भी कठिन लगेगा तथा हम वह कार्य कर नहीं पाएंगे।

💥 रुचि में कमी :-
🌸जैसा कि हम जानते हैं कि किसी भी व्यक्ति विशेष को किसी कार्य को सीखनी है करने में प्रेरणा का महत्वपूर्ण योगदान है ठीक उसी प्रकार उसी का भी बहुत ही महत्वपूर्ण योगदान होता है अगर बच्चे को किसी कार्य के प्रति रुचि नहीं है तो वह कार्य नहीं सीख सकता तथा अगर बच्चे में उस कार्य को करने के प्रति रुचि है तो वह जल्द से जल्द सीख लेता है तथा उसे कठिन भी नहीं लगता है इसलिए हमें ऐसे ऐसे रुचि पूर्ण कार्य करवाते रहना चाहिए जिससे बच्चे का ध्यान आकर्षित हो तथा उन्हें सीखने में परेशानी का सामना ना करना पड़े।

💥आत्मविश्वास में कमी :-
🌸 आत्मविश्वास, यह एक प्रकार की ऐसी आंतरिक शक्ति है जो हर एक व्यक्तियों में रहना अति आवश्यक है आत्मविश्वास के बिना कोई भी व्यक्ति किसी कार्य को करने के लिए उत्साहित नहीं रहता है जैसे कि अगर बच्चे में आत्मविश्वास की कमी आ जाती है तो उनका स्वयं से विश्वास हट जाता है तथा वह किसी कार्य को नहीं कर पाते तथा अपने कार्य में आत्मविश्वास और जागरूक नहीं हो पाते हैं।

💥उदासी एवं थकान :-
🌸जैसा कि हम सभी जानते हैं कि हम कोई कार्य कर रहे होते हैं तो उस समय हमें शारीरिक व मानसिक दोनों रूप से तैयार रहना अति आवश्यक होता है अगर कोई बच्चा शारीरिक रूप से पीड़ित है या उसे कोई बीमारी है या वह दिन भर का थका हुआ है तो वह कितना भी आसान कार्य क्यों ना हो उसे करने में उसे असावधानी महसूस जरूर होती है। इसलिए हमें किसी कार्य को करने के लिए शारीरिक तथा मानसिक रूप से भी तैयार रहना अति आवश्यक होता है।

💥उम्र और परिपक्वता :-
🌸होने लगता है आयु एवं परिपक्वता की योगदान से ही व्यक्ति के सर्वांगीण व्यक्तित्व का विकास होता है। कोई भी कार्य समय से पूर्व या समय के बाद नहीं हो पाता है।ठीक उसी प्रकार सीखना भी होता है कि अगर हम समय से पहले कुछ सीख जाते हैं तो भी हानिकारक है और समय से ज्यादा बाद सीखेंगे तभी भी हानिकारक होगा इसलिए हमें अपने कार्य समय-समय पर ही करना चाहिए।

💥किसी चीज के प्रति संवेदना और धारणा :-
🌸जब भी कोई बालक या व्यक्ति किसी विषय वस्तु को देख लेते हैं तो उस विषय या व्यक्ति के प्रति उनके मन में अनेकों प्रकार के विचार उत्पन्न होने लगते हैं।इसमें ज्ञानेंद्रियों का भी विकास होता है। और फिर उस वस्तु के प्रति अपनी उचित या अनुचित का धारणा बना लेते हैं जो कि सीखने में अत्यंत सहायक होता है।

💥भावनात्मक स्थिति :-
🌸 कई बार हमें देखने को मिलता है कि बच्चों की अनुकूल उनके परिवार में परिवेश ना होने के कारण तथा परिवार में हर वक्त वाद विवाद होने के कारण उन बच्चों की भावनात्मक स्थिति खराब होने लगती है जो कि शिक्षा में बहुत ही ज्यादा प्रभाव डालती है जैसे कि घर में माता-पिता के बीच झगड़ा हो और बच्चे ने सुन लिया तो उसे भी मानसिक परेशानी होता ही होता है। इसलिए बच्चे की शिक्षा को प्रभावी बनाने के लिए हमें अपनी परिवार परिवेश में भावनात्मक स्थिति भी शुद्र रखने की आवश्यकता है।

💥करके सीखने की योग्यता :-
🌸जैसा कि हम सभी जानते हैं।जो कार्य हम खुद से करके सीखते हैं।वह कार्य हम कभी भूलते नहीं और अच्छे से समझ में भी आ जाता है।बालक एक जिज्ञासु प्राणी है वह किसी भी कार्य को करते हुए देखते हैं तो करना चाहते हैं मतलब उन्हें हर एक चीज का प्रत्यक्ष रूप से प्रैक्टिकल करने की जिज्ञासा रहती है।बच्चे स्वयं करके भी सीखते हैं यह उनके लिए बहुत ही आवश्यक भूमिका निभाते हैं तथा उनका अनुभव बढ़ाते हैं और जीवन भर याद रहते हैं इसलिए हमें बच्चों को करके सीखने का मौका दिया जाना चाहिए जिसे विनय ने चीजों और तौर-तरीकों का खोज कर सके तथा उनकी स्मरण शक्ति बढ़ती रहे।

2️⃣ शिक्षा को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारक :-

💥 शिक्षक, साथी और माता पिता
💥 परिवेश (सामाजिक – सांस्कृतिक)
💥 मीडिया प्रभाव

💥शिक्षक, साथी और माता पिता :-
🌸इन सभी के साथ संबंध व सहयोग बच्ची को एक तनाव मुक्त वातावरण और उसे संतुलित विकास का सुविधा प्रदान करता है।

💥 परिवेश (सामाजिक – सांस्कृतिक) :-यह सारी स्थितियां शिक्षा को सीधा प्रभावित करती हैं। परिवेश बच्चों के विकास एवं स्थिति अनुकूल होनी चाहिए।

💥 मीडिया प्रभाव :-
🌸 मीडिया का हमारे दैनिक जीवन में बहुत ही बड़ा योगदान है।इसके द्वारा हम अपनी जानकारी आदान प्रदान करते हैं इसलिए यह कारक शिक्षा की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए जिम्मेदार हैं।

🔥🔥Notes by :- Neha Kumari 😊

🙏🙏🙏🙏धन्यवाद्🙏🙏🙏🙏

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🌀 *शिक्षा को प्रभावित करने वाले कारक*🌀

💫 *व्यक्तिगत कारक*➖

1️⃣ *प्रेरणा की कमी*➖ प्रेरणा की कमी एक महत्वपूर्ण कारक है जो बालक की शिक्षा को प्रभावित करती है। किसी बच्चे में
कुछ करने के लिए इच्छा, प्रेरणा से ही उत्पन्न होती है । यदि बालकों को प्रेरणा नहीं मिलती तो उनका किसी भी कार्य को करने में मन नहीं लगता है और भी बेहतर नहीं सीख पाते हैं।

2️⃣ *रुचि में कमी*➖

छात्रों में रुचि में कमी एक महत्वपूर्ण कारक है जो शिक्षा को प्रभावित करती है यदि बच्चों को पढ़ने में रुचि नहीं रहेगी तो उनका ध्यान पढ़ाई में नहीं लगेगा और भी बेहतर नहीं सीख पाएंगे।

3️⃣ *आत्मविश्वास में कमी*➖ आत्मविश्वास की कमी भी एक छात्र को उसकी योग्यता व क्षमता के आधार पर ज्ञान का निर्माण करने में बाधा उत्पन्न करती है बहुत अधिक आत्मविश्वास भी एक छात्र की कमजोरियों को स्वीकार करने और सुधारने से रोक सकता है। एक छात्र में आत्मविश्वास का होना बहुत ही आवश्यक है।

4️⃣ *उदासी* ➖ उदासी भी एक ऐसा कारक है जो शिक्षा को प्रभावित करता है यदि बच्चे किसी भी कारण से उदास हैं तो उनका मन यह रूचि शिक्षा में नहीं रखता है।

जैसे बच्चे के घर में कुछ हुआ है जैसे लड़ाई, इत्यादि को देखकर बच्चे के मन में उदासी छा जाती है और यह उदासी बच्चे की सीखने में बाधा उत्पन्न करता है।

5️⃣ *थकान*➖ थकान भी बच्चे की शिक्षा को प्रभावित करते हैं यदि बच्चे थकान महसूस कर रहे हैं । यदि बच्चे को जरूरत से ज्यादा कार्य दे दिया जाए तो बच्चे उस कार्य को करते-करते थकान महसूस करने लगते हैं। जिससे वे नहीं सीख पाते हैं।

6️⃣ *उम्र और परिपक्वता*➖ समय से पहले बच्चों का परिपक्व होना भी शिक्षा को प्रभावित करता है। बच्चे को सही समय में ही परिपक्व होना चाहिए क्योंकि कोई भी कार्य का स्तर आयु के आधार पर ही रखा जाता है।

7️⃣ *किसी चीज के प्रति संवेदना और धारणा*➖

कभी-कभी बच्चों में किसी भी चीज या कार्य के प्रति एक संप्रत्यय बन जाता है यह धारणा गलत भी हो सकती है और सही भी लेकिन यदि बच्चों के मन में किसी चीज के प्रति गलत धारणाएं बन जाती है । कभी-कभी ऐसा भी होता है कि बच्चे कुछ गलत सुन लेते हैं तो उसी के आधार पर अपनी धारणा बना लेते हैं जो उनकी सीखने को प्रभावित करता है।

8️⃣ *भावनात्मक स्थिति*➖ भावनात्मक स्थिति भी सीखने की गति में वृद्धि करती है कोई भी ज्ञान बच्चे के खुशी या संतुष्टि के अनुकूल होती है तभी बच्चा बेहतर सीख पाते हैं और यदि वह ज्ञान बच्चे के लिए संतोषप्रद नहीं होता है तो वह सीखने में बाधा उत्पन्न करता है। इसलिए किसी बच्चे की भावना भी शिक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है।

9️⃣ *करके सीखने की योग्यता*➖
जब बच्चा किसी कार्य को स्वयं से करता है तो उस कार्य को आसानी से सीख जाता है और यदि वह उस कार्य को स्वयं नहीं करता है केवल सुन और समझ लेते हैं लेकिन उस कार्य को खुद से करके नहीं देखते हैं तो वे उस कार्य को करने में असफल हो जाते हैं जो उनकी शिक्षा को प्रभावित करता है।

🔟 *किसी तथ्य के प्रति रवैया*➖ किसी तथ्य के प्रति रवैया भी बच्चे की शिक्षा को प्रभावित करता है। यदि बच्चे ने किसी तथ्य को लेकर उसका व्यवहार या रवैया अच्छे से नहीं रहता है तो यह व्यवहार भी उनकी शिक्षा में बाधा उत्पन्न करता है।

💫 *शिक्षा को प्रभावित करने वाले वातावरणीय कारक*💫

1️⃣ *शिक्षक ,साथी और माता-पिता*➖ इनके साथ संबंध और सहयोग एक बच्चे को तनाव मुक्त वातावरण और उसके विकास की सुविधा प्रदान करता है छात्रों के व्यवहार को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।शिक्षक माता-पिता और साथियों के साथ संबंध भी एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय कारक हैं जो बच्चे की शिक्षा को प्रभावित करता है।

2️⃣ *परिवेश (प्राकृतिक सांस्कृतिक, सामाजिक)*➖ बच्चे की शिक्षा में परिवेश भी एक महत्वपूर्ण कारक है जो प्रभावित करता है प्राकृतिक कारक जैसे बच्चे के आसपास की जलवायु वायुमंडल स्थितियां आदि आते हैं जो कि बच्चे की सीखने को प्रभावित करते हैं सांस्कृतिक कारक जैसे बच्चे की संस्कृति भी सीखने को प्रभावित करता है सामाजिक परिवेश में विशेष रुप से घर का वातावरण शामिल होता है जो बच्चे के सीखने को प्रभावित करता है।

यह सभी स्थितियां शिक्षा को सीधे प्रभावित करती हैं परिवेश जो है, बच्चों के विकास और स्थिति के अनुकूल होनी चाहिए।

3️⃣ *मीडिया का प्रभाव*➖ मीडिया जानकारी आदान प्रदान करने का प्रमुख स्रोत है इसलिए यह कारक शिक्षा की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए जिम्मेदार हैं।

✍🏻notes by manisha gupta ✍🏻

🔆 शिक्षा को प्रभावित करने वाले कारक ➖

🎯 व्यक्तिगत कारक➖

व्यक्तिगत कारक वो है जो व्यक्ति के खुद के होते हैं और जिनसे शिक्षा प्रभावित होती है क्योंकि जो व्यक्तिगत कारक हैं उनको व्यक्ति स्वयं क्रिएट या उत्पन्न करता है |

बालक की शिक्षा को प्रभावित करने वाले विभिन्न प्रकार के व्यक्तिगत कारक हैं जो कि निम्न है ➖

🔅प्रेरणा की कमी ➖

यदि किसी कार्य को सीखने के प्रति हमारी प्रेरणा नहीं है तो हम उस कार्य को लग्न के साथ नहीं करते हैं और यदि उस कार्य के प्रति हमारी प्रेरणा है तो हम उस कार्य को पूरी लग्न और ईमानदारी के साथ करते हैं अर्थात प्रेरणा सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार की हो सकती है जिसका योगदान शिक्षा में प्रमुख रूप से है |

🔅 रुचि में कमी ➖

यदि किसी कार्य को करने में हमें रुचि नहीं है तो इससे भी हमारी शिक्षा प्रभावित होती है क्योंकि किसी भी कार्य को बिना रूचि के नहीं किया जा सकता है |
जैसे यदि किसी की रूचि शिक्षक बनने के प्रति है और उसे जबरदस्ती पुलिस का कार्य करवाया जाता है तो वह व्यक्ति पुलिस की जिम्मेदारी को उतने अच्छे से नहीं निभा सकता जितनी वो शिक्षक की जिम्मेदारी को निभा सकता है क्योंकि उसे पुलिस बनने के प्रति रूचि नहीं है |

🔅 आत्मविश्वास में कमी ➖

किसी बच्चे को या किसी व्यक्ति को स्वयं में आत्मविश्वास नहीं है तो वह किसी भी कार्य को पूरा नहीं कर सकता है और अपनी शिक्षा में संपूर्ण योगदान नहीं दे सकता है जिससे उसकी शिक्षा प्रभावित हो सकती है |
जैसे यदि हमें शिक्षक प्रतियोगिता को उत्तीर्ण करना है तो हमें स्वयं पर आत्मविश्वास होना जरूरी है कि हां हम कर सकते हैं लेकिन यदि हमें स्वयं में आत्मविश्वास नहीं है तो हम शिक्षक प्रतियोगिता को उत्तीर्ण नहीं कर सकते हैं |
और इस प्रकार से हमारी शिक्षा प्रभावित होती है इसलिए आत्मविश्वास में कमी भी शिक्षा को प्रभावित करने वाला एक महत्वपूर्ण कारक है |

🔅 उदासी ➖

उदासी भी किसी न किसी प्रकार से हमारी शिक्षा को प्रभावित करने का एक महत्वपूर्ण कारक है उदाहरण के लिए यदि हमारा मन किसी कारण से उदास है तो इससे भी पढ़ाई में मन नहीं लगता है या पढ़ाई करने का मन नहीं करता है और इससे भी शिक्षा प्रभावित होती है |

🔅 थकान ➖

थकान शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार की हो सकती है शारीरिक थकान अत्यधिक कार्य करने से होती है और मानसिक थकान मस्तिष्क पर अधिक जोर देने पर हो जाती है जिससे हमारा मस्तिष्क कार्य करना बंद कर देता है इससे भी शिक्षा प्रभावित होती है और यह शिक्षा को प्रभावित करने वाला एक प्रमुख कारक है |

🔅 उम्र की परिपक्वता ➖

परिपक्वता शिक्षा को सकारात्मक और नकारात्मक दोनों प्रकार से प्रभावित करती है सकारात्मक परिपक्वता वह है जो उचित समय पर /सही समय में सही उम्र के साथ आती है और नकारात्मक परिपक्वता वह है जो समय से पहले और उम्र से पहले ही आ जाती है जैसे कई लोग अपने आप को समय से पहले परिपक्व दिखाना चाहते हैं जो कि उनके आने वाले जीवन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है इसलिए परिपक्वता सही समय पर सही उम्र के साथ आए तभी वह अच्छा परिणाम दिखाती है अन्यथा उसके नकारात्मक परिणाम भी होते हैं और इस प्रकार से हमारी शिक्षा प्रभावित होती है |

🔅 किसी चीज के प्रति संवेदना ➖

अर्थात किसी चीज के प्रति धारणा बनाना जो कि शिक्षा को बहुत प्रभावित करती है |
जैसे कोई पुस्तक किसी पब्लिकेशन से प्रकाशित होती है जो कि उस पब्लिकेशन के प्रति हमारी गलत धारणा है तो वह बदलती नहीं है और उस पुस्तक से पढ़ने का मन नहीं करता है जो कि शिक्षा को बहुत अधिक प्रभावित कर सकता है या करता है |

🔅 भावनात्मक स्थिति ➖

किसी भी कार्य के प्रति यदि हमारी भावना है तो उससे भी पढ़ाई में मन नहीं लगता जैसे किसी कार्य में या किसी चीज में हम असफल हो जाते हैं तब भी पढ़ाई में मन नहीं लगता है इससे हमारी शिक्षा प्रभावित होती है क्योंकि असफल हो जाने के बाद व्यक्ति दुखी ,कुंठित और परेशान रहता है जिससे शिक्षा प्रभावित होती है इसके विपरीत यदि व्यक्ति की संवेदना जखुशी मैं है तब भी व्यक्ति का पढ़ाई में मन नहीं लगता है और इस प्रकार भी शिक्षा प्रभावित होती है |

🔅 करके सीखने की योजना ➖

करके सीखने की योजना से भी शिक्षा प्रभावित होती है जैसे हम कुछ भी करके सीखते हैं तो हमारा ज्ञान स्थाई हो जाता है और नहीं करते हैं तो हम उसे जल्द ही भूल जाते हैं और इस प्रकार भी शिक्षा प्रभावित होती है |

🔅 किसी तथ्य के प्रति रवैया ➖

हमें किसी उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए उस लक्ष्य के प्रति अपने तरीके को को देखना चाहते हैं तो उसके लिए सबसे पहले उस लक्ष्य के प्रति, तरीका कैसा है रवैया कैसा है हम जो व्यवहार करते हैं वह कैसा है यदि यह हमें पता नहीं होगा तब भी उससे हमारी शिक्षा प्रभावित होती है जो कि हमारे व्यक्तिगत कारक है इसके लिए हम स्वयं जिम्मेदार होते हैं |

व्यक्तिगत कारक वो है जिन्हें व्यक्ति खुद उत्पन्न करता है जो व्यक्ति की शिक्षा को को आंतरिक रुप से प्रभावित करते हैं |

🎯 शिक्षा को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारक ➖

🔅 शिक्षक ,साथी, और माता-पिता ➖

यदि शिक्षक साथी और माता-पिता इन सभी स्तर पर बच्चे के प्रति व्यवहार अच्छा है तो बच्चा एक अच्छे प्रकार से ग्रोथ कर सकता है और उसका मानसिक तनाव भी कम हो सकता है |
अर्थात माता-पिता ,शिक्षक और साथी इन सब के साथ संबंध है और सहयोग अच्छा है तो एक बच्चे को तनाव मुक्त वातावरण और उसके विकास की सुविधा प्रदान की जा सकती है |

🔅 परिवेश (प्राकृतिक, सांस्कृतिक, सामाजिक,) ➖

जो हमारी प्रकृति है हमारी संस्कृति है या हमारी सामाजिकता है जो शिक्षा को सीधे प्रकार से प्रभावित करती है |
अर्थात यह सभी स्थितियां शिक्षा को सीधे प्रभावित करती है इसके साथ-साथ परिवेश एक बच्चे के विकास में और साथ ही साथ बच्चे की स्थिति के अनुकूल होना चाहिए अन्यथा इससे बच्चे की शिक्षा में बहुत अधिक प्रभाव पड़ेगा |

🔅 मीडिया का प्रभाव➖

मीडिया जानकारी साझा करने या जानकारी आदान प्रदान करने का एक महत्वपूर्ण स्रोत है इसलिए यह कारक भी शिक्षा की प्रक्रिया को प्रभावित करने में जिम्मेदार है |
इन सभी की जिम्मेदारी है कि बच्चे की शिक्षा में जितना प्रभावी है जितनी जानकारी है। कितनी आवश्यकता है कितना,नहीं है इन सभी बातों का मुख्य रुप से ध्यान रखा जाए अन्यथा वर्तमान स्थिति में बच्चे की शिक्षा में बहुत अधिक प्रभाव पड़ सकता है क्योंकि वर्तमान स्थिति में मीडिया की भूमिका बहुत अधिक प्रभावी है

𝙉𝙤𝙩𝙚𝙨 𝙗𝙮➖ 𝙍𝙖𝙨𝙝𝙢𝙞 𝙎𝙖𝙫𝙡𝙚

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🌊शिक्षा को प्रभावित करने वाले कारक🌀
(Factor Effecting to learning)

ऐसे कारक जो किसी न किसी रूप में बच्चे की शिक्षा को प्रभावित करता है या बधा पहुंचाती है। इसके निम्न कारक हो सकते हैं ………

💐व्यक्तिगत कारक ( individual factor)-इसमें बच्चे के खुद की कमी होता है, इनके अनेकों वजह हो सकते हैं जो बच्चे के शिक्षा को प्रभावित करते हैं अतः शिक्षा को प्रभावित करने के निम्नलिखित कारक है………..

🌲प्रेरणा की कमी…..
किसी भी कार्य को करने का मन नहीं है , में भी एक प्रेरणा की कमी हो सकती हैं कभी कभी बच्चों को तत्कालिक या परिवारिक reason के कारण motion नहीं मिल पाते हैं। जिसके कारण व शिक्षा को प्रभावित करते हैं।

🌾रुचि में कमी……..
जब हम किसी कार्य को करते हैं तो अपनी रुचि से।अगर हमें रुचि है तो हम उस कार्य को दिलचस्पी से करते हैं नहीं तो उस काम को करने में मन नहीं लगता हैं। जैसे-गणित, विज्ञान, संस्कृत, इत्यादि। अलग-अलग विषयों का अध्ययन करते हैं क्योंकि उनमें हमारा interest हैं और हम 100%भी देते हैं जिस विषय में रुचि नहीं होती हैं उनमें अच्छा नहीं कर पाते हैं।

🌻आत्मविश्वास में कमी………
किसी कार्य को करने के लिए खुद पर भरोसा नहीं है या विफलता का डर लगता हैं तो हम उस कार्य को करने में अवश्य ही विफल हो जायेंगे। अगर हमें उस कार्य को करने का आत्मविश्वास है तो हम अवस्य ही सफल हो जायेंगे।

😯उदासी…..
यदि हम किसी कारण वश उदास है और कोई कार्य करना चाहते हैं तो हम उस कार्य को करने की कोशिश करते हुए भी पूरा नहीं कर पायेंगे।

😥थकान……
मान लीजिए कि हम थके हुए है चाहे मानसिक या शारीरिक रूप से और हम किसी कार्य को करना चाहते हैं तो थकान के कारण उस कार्य को पूरा/अच्छे से नहीं कर पायेंगे।

🧔उम्र या परिपक्वता…..
कई बार हम किसी कार्य को करना चाहते हैं और वह ठीक से नहीं कर पाते हैं त्रुटियां भी हो जाती हैं तो इसका मतलब उस उम्र में परिपक्वता नहीं होती हैं।

🌸किसी चीज के प्रति संवेदना और धारणा………
यदि किसी वस्तु के प्रति हमारी धरणा या संप्रत्यय अच्छी नहीं बन पाती है तो हम उस कार्य को करने में बेहतर प्रतिक्रिया नहीं दे पाते हैं।

⭐भावनात्मक स्थिति………
यदि किसी कार्य के प्रति हमारा भाव अच्छा नहीं है तो हम उस कार्य को ठीक तरह से नहीं कर पाते हैं

🌳करके सीखने की योग्यता…….
कई बालक प्रतिभाशाली होते हैं वह हर क्षेत्र में बेहतर करता है लेकिन कभी-कभी आलसी प्रवृत्ति के कारण उस कार्य को बेहतर नहीं कर पाते हैं।

🌊किसी तथ्य के प्रति रवैया
यदि किसी कार्य के प्रति अटेम्प्ट/रवैया अच्छा नहीं है तो हम उस कार्य को अच्छे से नहीं कर सकते हैं।

🌹शिक्षा को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारक………
बच्चों के शिक्षा को प्रभावित करने वाले केवल व्यक्तिगत कारक ही नहीं ,अपितु पर्यावरणीय कारक भी बच्चों क के शिक्षा को प्रभावित करते हैं।

👩‍🏫शिक्षक साथी और माता-पिता……
शिक्षक साथी और माता – पिता के साथ संबंध और सहयोग एक बच्चे को तनाव मुक्त वातावरण और उसके विकास की सुविधा प्रदान करता है। क्योंकि बच्चा इन्हीं सब के साथ अधिकतर समय व्यतीत करते हैं।

🌀परिवेश (प्राकृतिक ,सांस्कृतिक, सामाजिक) -…..
प्राकृतिक ,सांस्कृतिक, सामाजिक ये सभी स्थितियां शिक्षा को सीधे प्रभावित करते हैं ।
परिवेश बच्चों के विकास और साथ-साथ बच्चों के स्थिति के अनुकूल होनी चाहिए।

⛽🚨मीडिया का प्रभाव…..
आजकल जो हम डिजिटल सेवा का उपयोग कर रहे हैं वह कहीं ना कहीं मीडिया का प्रभाव है।
अर्थात जानकारी आदान प्रदान करने का प्रमुख स्रोत है। इसलिए यह कारक शिक्षा की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए जिम्मेदार हैं।
🙏💐🌹
Notes by-SRIRAM PANJIYARA 🌸🌺🙏

🔆 शिक्षा को प्रभावित करने वाले कारक 🔆
(factors affecting to learning)
▶ शिक्षा को प्रभावित करने वाले व्यक्तिगत कारक -: इसमें बच्चों के स्वयं की समस्याएं होती है जो शिक्षा को प्रभावित या बाधा उत्पन्न करती है |
प्रेरणा की कमी, रुचि में कमी, आत्मविश्वास में कमी, उदासी, थकान, उम्र और परिपक्वता, किसी चीज के प्रति संवेदना और धारणा, भावनात्मक स्थिति, करके सीखने की योग्यता, किसी भी तथ्य के प्रति रवैया,
◼ प्रेरणा की कमी ➖ प्रेरणा की कमी तब होती है जब बच्चों को सही मार्गदर्शन ना मिल पाना जिससे बच्चों की शिक्षा पर प्रभाव पड़ता है उनमें प्रेरणा की कमी दिखाई देती है जिससे बच्चे अपने कार्य के प्रति प्रेरित नहीं होते हैं इससे वह समस्या का कारण बनते है और शिक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करता है |
◼ रुचि में कमी ➖ जब बच्चा किसी कार्य को करने के लिए रूचि नहीं लेता है वह कार्य को अपनी क्षमता के अनुसार भी नहीं कर पाता है जिससे वह शिक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करता है अगर बच्चे मे कार्य को करने में रुचि है तो वह कार्य करेगा |
◼ आत्मविश्वास की कमी ➖ अगर बच्चे में किसी कार्य को करने में खुद पर आत्मविश्वास नहीं है तो वह उस कार्य को नहीं कर पाएगा और हमेशा डरता ही रहेगा हर बच्चे में आत्मविश्वास होना बहुत ही जरूरी है वह अपने कार्यों को बेहतर रूप से कर सकते हैं |
◼ उदासी ➖ यदि बच्चा किसी का कार्य को करने मे किसी कारणवश उदास है वह कार्य को नहीं कर पा रहा है जिससे वह कार्य करने में अपना स्वयं का पूरे योगदान नहीं दे पा रहा है से बहुत उदास रहता है |
◼ थकान ➖ जब बच्चा कार्य करता है और ऊपर से अतिरिक्त कार्य और दे दिया जाता है जिससे उस पर भार पड़ता है वह कार्य को धीरे धीरे करता है थका हुआ महसूस करता है वह दिमाग बोलता है हमें उस कार्य को करना है उस कार्य को करने के लिए शरीर साथ नहीं देता है वह कार्य को नहीं कर पाता है|
◼ उम्र और परिपक्वता ➖ यदि बच्चा कार्य करता है और उम्र से अधिक कार्य करता है तो वह अच्छे से नहीं कर पाते हैं जैसे- जैसे बच्चे की उम्र बढ़ती है परिपक्वता आने लगती है तो वह कार्य करने लगते हैं परिपक्वता भी बच्चो में सीखने की भूमिका महत्वपूर्ण है|
◼ किसी चीज के प्रति संवेदना और धारणा ➖ किसी वस्तु के प्रति धारणा गलत बन जाती है जिसके कारण वह आगे नहीं बढ़ पाते है खुद का बेहतर नहीं दे पाता है जैसे किसी पब्लिकेशन की बुक है उसमें बहुत सारी गलती है जिससे बच्चे को गलत धारणा बना दी है कि वह बुक नहीं पढ़ते उसमें बहुत गलतियां हैं वह पब्लिकेशन के प्रति गलत धारणा बन गई है |
◼ भावनात्मक स्थिति ➖ किसी कार्य के प्रति हमारी भावना अच्छी नहीं है तो वह कार्य अच्छे से नहीं कर पाते हैं भावनात्मक स्थिति हमें शिक्षा में सफल भी बनाती है और असफल भी यह हमें समझना चाहिए |
◼ करके सीखने की योग्यता ➖ करके सीखने के लिए योग्यता जैसे कि बच्चों को सब आता है पर खुद से करके नहीं देखता है जिससे वह शिक्षा से प्रभावित होता है जब तक खुद से नहीं करेंगे चाहे जितना भी ज्ञान हो उसकी योग्यता में कमी ही रहेगी वह आलसी प्रवृति का होगा अपना बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पाएगा |
◼ किसी भी तथ्य के प्रति रवैया ➖ बच्चों का किसी के प्रति तरीका या बर्ताव कैसा है यह उसके व्यवहार से समझ आता है जिससे वह दूसरे के प्रति किसी तथ्य को लेकर के कैसा रवैया रखता है जैसे बच्चे का शिक्षा के प्रति रवैया अच्छा नहीं है तो मैं अच्छे से शिक्षण अधिगम नहीं कर पाएगा |
▶ शिक्षा को प्रभावित करने वाले पर्यावरणीय कारक ➖ बालकों को शिक्षा के प्रति प्रभावित करने वाले बाहरी कारक :-
◼ शिक्षा साथी और माता-पिता ➖ शिक्षा साथी और माता-पिता के साथ जो संबंध या सहयोग एक बच्चे को तनाव मुक्त वातावरण और उसके विकास की सुविधा प्रदान करता है क्योंकि बच्चे अधिकतम समय कक्षा एवं अपने माता-पिता के साथ व्यतीत करती है |
◼ परिवेश प्राकृतिक सांस्कृतिक सामाजिक ➖ इसमें आसपास का वातावरण पड़ोसी के सभी आते हैं सभी स्थितियां शिक्षा को सीधे प्रभावित करती है परिवेश बच्चे के पास और स्थिति के अनुकूल होना चाहिए |
◼ मीडिया का प्रभाव ➖ बच्चों में कई प्रकार की जानकारी का आदान प्रदान करने के लिए प्रमुख महत्वपूर्ण होता है क्योंकि बच्चों पर इसका प्रभाव बहुत ही अधिक पड़ता है शिक्षा की प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए जिम्मेदार है |
Notes by – Ranjana Sen

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