🔆प्राचीन समाज में शिक्षा का अर्थ

▪️प्राचीन काल में शिक्षा का अर्थ आत्मज्ञान था।

✨स्वामी विवेकानंद के हिसाब से शिक्षा का महत्व

“जो विचार जीवन निर्माण, मनुष्य निर्माण ,चरित्र निर्माण में सहायक हो वही शिक्षा है।”

▪️जीवन निर्माण (life build) से तात्पर्य हमारा जो जीवन का जो मकसद है उसके दर्शन को समझना।

▪️मनुष्य निर्माण(human build) से तात्पर्य मनुष्य की मानवता का निर्माण होने से है।

▪️चरित्र निर्माण(character build) से तात्पर्य व्यक्ति के नैतिक गुणों से है।

❇️औपचारिक शिक्षा और अनौपचारिक शिक्षा

⚜️औपचारिक शिक्षा (formal education)➖

इसमें शिक्षा देने की योजना तैयार रहती है
जैसे समय, स्थान, अध्यापक, शिक्षण विधि, पाठ्यक्रम आदि यह सभी पूर्व से निर्धारित रहता है जिसके आधार पर शिक्षा दी जाती है।

⚜️अनौपचारिक शिक्षा (informal education)

यह एक जीवन भर चलने वाली प्रक्रिया है इसमें शिक्षा बहुत ही व्यापक या विस्तृत होती है।

⚜️दूरस्थ शिक्षा (distance education)

🔸दूरस्थ शिक्षा का मतलब दूर रहकर शिक्षा ग्रहण करना।

🔸इसके अंदर शिक्षा प्रदान करने वाले और शिक्षा ग्रहण करने वाले के बीच दूरी रहती है।

❇️कुछ महत्वपूर्ण तथ्य

🌀वुड के घोषणा पत्र के आधार पर कंपनी ने शिक्षा नीति कब घोषित की ❓

🔹वुड का घोषणा पत्र :- 1 8 5 3

🔹जिसमें आधुनिक भारतीय शिक्षा को विकास की किशोरावस्था कहा गया ।

🔹शिक्षा नीति की घोषणा :- 19 जुलाई 1 8 5 4

🌀मैकाले ने अपना विवरण प्रस्तुत किया ❓

🔹2 फरवरी 1 8 3 5 मैं लॉर्ड विलियम बेंटिक को पत्र विवरण भेजा।

🌀राधा कृष्ण आयोग की नियुक्ति कब हुई ❓

🔹4 नवंबर 1 9 4 8

🌀माध्यमिक शिक्षा आयोग के अध्यक्ष कौन थे ❓ और उनकी नियुक्ति कब हुई ❓

नियुक्ति :- 23 सितंबर 1 9 5 2
अध्यक्ष :- लक्ष्मण स्वामी मुदालियर

🌀आदर्शवाद को कितने भागों में बांटा गया ❓

मुख्यत: पांच भागों में
📍1 आत्म निष्ठ आदर्शवाद(self-respecting Idea list)
📍2 वस्तुनिष्ठ आदर्शवाद(objective Idealist)
📍3 निरपेक्ष आदर्शवाद(absolute Idealist)
📍4 पाश्चात्य आदर्शवाद (Western Idealist)

✴️1 आत्मनिष्ठ आदर्शवाद

कोई काम जो हम अपने अंदर से या स्वयं से सोच समझकर करते हैं।

✴️2 वस्तुनिष्ठ आदर्शवाद

कुछ विशिष्ट चीजों में से बेहतर चीजों को अपने जीवन में उतारते हैं।

✴️3 निरपेक्ष आदर्शवाद

जो बिल्कुल उचित या सही है तथा सभी के पक्ष में उस कार्य को करते हैं।

✴️4 पाश्चात्य आदर्शवाद

पश्चिमी संस्कृति एक आदर्शवाद बताया गया है।

🌀प्रकृतिवाद (neutralism)/प्रकृति वादी दर्शन

यह दर्शन कि वह विचारधारा है जो प्रकृति को मूल तत्व मानती है इसके अनुसार भौतिक जगत ही सत्य हैं इनके अतिरिक्त और किसी शक्ति का अस्तित्व नहीं है।

“प्रकृति की ओर लौटो :- रूसो”

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Notes By Vaishali Mishra

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