🔳 *समावेशी शिक्षा के आधार* ◼️1 समावेशी शिक्षा समुदाय के रूप में होती है। पूरा समुदाय एक साथ सीखता है और विशेष आवश्यकता वाला बच्चा भी उस समुदाय का सदस्य होता है। [ विद्यालय की जितने भी बच्चे हैं वह एक समुदाय ही है और इसी समुदाय के आधार पर बच्चे सीखते हैं] ◼️2 प्रत्येक बालक स्वाभाविक रूप से सीखने के लिए अभिप्रेरित रहता है। [ हर बच्चा चाहे वह सामान्य हो या विशिष्ट हर तरह का बच्चा सीखने की प्रति स्वाभाविक रूप से तभी प्रेरित रहता है जब उसको वैसा वातावरण या वैसा माहौल मिलता है जिसमें वह सीखना चाहता है या सीख सकता है। यदि वातावरण उपलब्ध करवा दिया जाए लेकिन उनमें सीखने के दौरान किसी प्रकार की कमी या उनमें अपनी कमी के प्रति हीन भावना होंगी तो वह सीखने के लिए कभी भी सहज रूप से प्रेरित नहीं रह पाएंगे और ना ही सीख पाएंगे। अगर बच्चा सीखने के लिए प्रेरित नहीं है तो इसका मतलब यह है कि उसे समावेशी शिक्षा के आधार पर शिक्षा नहीं मिल रही है।] ◼️3 कक्षा के सभी बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता में बिना किसी भेदभाव के सुधार लाना है। [जैसे यदि किसी बच्चे को कम दिखाई देता है तो हम यह नहीं बोल सकते कि उसकी कमी के कारण वह पढ़ नहीं सकता यह सीख नहीं सकता बल्कि हमें उसकी इस परेशानी पर सुधार करना है और बिना किसी भेदभाव के उसे आगे बढ़ाना है। बच्चे की हर कमी को पूरा कर व उसमें सुधार कर आगे बढ़ाना है।] ◼️4 बच्चे के सीखने के तौर तरीके में विविधता होती है जैसे ✓अनुभवों के द्वारा ✓अनुकरण के द्वारा ✓चर्चा के द्वारा ✓खेल क्रियाकलाप के द्वारा ✓खुद गतिविधि करके ✓प्रश्न पूछ कर ✓सुनकर सीखते हैं। ✓कुछ बच्चे चिंतन मनन से सीखते हैं। सभी बालक को हर तरह के अवसर प्रदान करने चाहिए। [ सभी में विविधता होती हैं कोई किसी तरीके से ज्यादा अच्छे से सीख सकता है तो कोई अन्य तरीके से ज्यादा अच्छे से सीख सकता है सभी का सीखने का तरीका अलग अलग होता है। उपरोक्त सभी विविधता जिसमें होती हैं वह उतना जल्दी और बेहतर व प्रभावी रूप से सीखता है। जिसमें कम विविधताएं होती हैं उसे सीखने में ज्यादा समय लगता है । सभी बालक को हर तरह के या लोकतांत्रिक तरीके से या आसान व प्रभावी रूप से सीख पाने के अवसर प्रदान करने चाहिए। जब यह सभी विविधता होती हैं तो सीखने की प्रायिकता भी ज्यादा बढ़ जाती है।] ◼️5 बालक को सीखने से पूर्व सिखाने के लिए तैयार करना आवश्यक है उसके लिए सकारात्मक वातावरण का निर्माण करने की आवश्यकता है। [जब तक बच्चा सकारात्मक वातावरण में नहीं रहेगा तब तक वह नहीं सीख पाएगा चाहे बच्चा कितना भी होशियार या समझदार हो। हर कक्षा में शिक्षक द्वारा सकारात्मक वातावरण बनाना अत्यंत आवश्यक है तथा सीखने से पूर्व कुछ तैयारी कर लेनी चाहिए जिससे सकारात्मक वातावरण रुके नहीं बल्कि वह पूरी तरह व निरन्तर रूप से बना रहे।] ◼️6 बालक उन्हीं सीखी हुई बातों के साथ अपना संबंध स्थापित कर पाता है जिनके बारे में समझ उसके अपने परिवेश के कारण भली-भांति समय में विकसित हुई हो । [हम किसी भी बात को अपने मन में तभी जगह दे पाते हैं जब वह चीज हमारी जीवन से या परिवेश से जुड़ी होती है या वह हमें पसंद होती है और यह हमारी पसंद हमारी परिवेश या हमारे जीवन से विकसित होती है। जैसे ही हम जन्म लेते हैं तो अनुवांशिक गुण हमारे अंदर आते हैं लेकिन आगे जाकर इन गुणों का पोषण हमारे परिवेश या वातावरण से ही होता है। हम किसी भी कार्य की समझ अपने परिवेश के कारण ही विकसित कर पाते हैं । जैसे हमें कोई चीज पसंद नहीं होती लेकिन जब वही चीज हमारे वातावरण या परिवेश में ज्यादा चलन में होती है तो हम उस परिवेश के चलन के हिसाब से उस चीज को पसंद करने लेने लगते हैं।] ◼️7 सीखने की प्रक्रिया विद्यालय के साथ साथ विद्यालय के बाहर भी चलती है इसीलिए इसको ऐसे व्यवस्थित करें कि बच्चे पूर्ण रूप से उसमे सम्मिलित हो जाए और उसके बारे में अपने आधार पर अपनी समझ विकसित कर सकें। [जब हमें कोई चीज मालूम चलती है या हम सीखते हैं तो उसे हम किसी भी तरह से किसी भी रूप में कहीं पर भी या बाहरी वातावरण से जोड़कर सीखते हैं इससे हम यह भी जान जाते हैं कि कोई चीज किस आधार पर कार्य करती है। इसीलिए सीखने की प्रक्रिया का आयोजन इस प्रकार होना चाहिए जिससे बच्चे कक्षा के बाहर भी उसे जोड़ कर उस चीज के प्रति अपने आधार पर अपनी समझ विकसित कर पाए। यदि ऐसा नहीं होता है तो बच्चों को पढ़ाई बहुत लगती है तथा जो भी कुछ सीखा हुआ है वह कक्षा तक ही सीमित रह जाएगा।] ◼️8 सीखने सिखाने की प्रक्रिया में आरंभ करने से पूर्व बच्चे के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक, भौगोलिक और राजनीतिक परिपेक्ष्य को जानना जरूरी है। [ जब इन सभी परिप्रेक्ष्य के बारे में शिक्षक को पता है तो वहां यह जान सकता है कि बच्चे का प्लस पॉइंट क्या है और माइनस पॉइंट क्या मतलब उसे कहां जरूरत है और कहा नहीं या जिसको जो जरूरत है उसकी वो जरूरत की पूर्ति करके ही सीखने सिखाने की प्रक्रिया आरंभ करनी चाहिए।] ◼️9 प्रत्येक बालक की विविधता का आदर करना चाहिए। ⚜️ *समावेशी शिक्षा का क्रियान्वयन*➖ 🔸1 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की कमर उम्र में ही *जन स्वास्थ्य केंद्र व एकीकृत बाल विकास केंद्र* के माध्यम से पहचान की जाए। 🔸2 जहां तक संभव हो सके विशेष आवश्यकता वाले बच्चो को सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा दी जाए। 🔸3 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को आवश्यक सहायक सामग्री और उपकरण के द्वारा सिखाया जाए। 🔸4 विभिन्न सहायक सेवाएं दी जाए जैसे ✓स्वस्थ आधारित वातावरण ✓संसाधन कक्ष ✓विशेष पाठ्य सामग्री ✓विशेष शिक्षण तकनीक ✓उपचारात्मक (शिक्षण सामग्री) 🔸5 शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम करवाए जाए। ✍🏻 *Notes By-Vaishali Mishra* ❄ समावेशी शिक्षा के आधार ❄ 🌀 समावेशी शिक्षा *समुदाय* के रूप में होती है पूरा समुदाय एक साथ सीखता है और विशेष आवश्यकता वाला बच्चा भी उस समुदाय का सदस्य होता है ( जो भी बच्चे हैं वह किसी ना किसी समूह के सदस्य होते हैं और वह उसी समूह या समुदाय में रहकर ही सीखते हैं इसलिए कहा जा सकता है कि समावेशी शिक्षा समुदाय के रूप में होती है ) 🌀 प्रत्येक बालक *स्वाभाविक* रूप से सीखने के लिए अभिप्रेरित रहता है अर्थात कहने का तात्पर्य यह है की बच्चों की सीखने की प्रवृत्ति स्वाभाविक होती है वह स्वतः ही कुछ ना कुछ सीखने के लिए प्रेरित रहते हैं उत्सुक होते हैं तभी हम उनको सिखा पाते हैं जब वह किसी कार्य को करने के लिए उत्साहित या प्रेरित रहते होते हैं । 🌀 कक्षा के सभी बच्चों की *शैक्षणिक* *गुणवत्ता* में बिना किसी भेदभाव के सुधार लाना है ( अर्थात हमें सभी बच्चों को एक समान यह बिना किसी भेदभाव के सभी को शैक्षणिक गुणों में सुधार लाना है जैसे कोई यदि किसी को कम दिखता है तो उसे हम सबसे आगे बठायेंगे या जो भी परेशानी है हम उसकी बात को समझेंगे और उसमें सुधार करने की कोशिश करेंगे ) 🌀 बच्चे के सीखने के तौर-तरीकों में विविधता होती है 👉 अनुभवों के द्वारा सीखना 👉 अनुकरण के द्वारा सीखना 👉 चर्चा या बातचीत के द्वारा सीखना 👉 प्रश्न पूछना 👉 सुनकर सीखना 👉 चिंतन मनन करना 👉 खेल क्रिया कलाप द्वारा सीखना 👉 गतिविधि करके सीखना 🌀 सीखने के पूर्व सीखने सिखाने के लिए तैयार करना आवश्यक है इसके लिए सकारात्मक वातावरण निर्माण करने की आवश्यकता है 🌀 बालक उन्हीं बातों के साथ अपना संबंध स्थापित कर पाता है जिनके बारे में उसके अपने परिवेश के कारण भलीभांति समझ विकसित हुई हो। 🌀 सीखने की प्रक्रिया विद्यालय के साथ साथ विद्यालय के बाहर भी चलती रहती है इसलिए इसको ऐसे व्यवस्थित करें कि बच्चा पूर्ण रूप से सम्मिलित हो जाए और उसके बारे में अपने आधार पर समझ विकसित करें 🌀 सीखने सिखाने की प्रक्रिया आरंभ करने से पूर्व बच्चे के सामाजिक सांस्कृतिक आर्थिक भौगोलिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य को जानना जरूरी है 🌀 प्रत्येक बालक की विविधता का आदर करना चाहिए 🔅 समावेशी शिक्षा का क्रियान्वयन 🔅 👉 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की कम उम्र में ही जन स्वास्थ्य केंद्र ,एकीकृत बाल विकास केंद्र के माध्यम से पहचान की जानी चाहिए 👉 जहां तक हो सके विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा दी जाए 👉 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को आवश्यक सामग्री और उपकरण उपलब्ध कराया जाए 👉 सहायक सेवा दी जाए जैसे कि स्वस्थ बाधा रहित वातावरण , विशेष शिक्षण तकनीक हो , विशेष पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जाए , उपचारात्मक शिक्षण सामग्री 👉 शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम करवाया जाए। धन्यवाद नोट्स बाय प्रज्ञा शुक्ला 🙏🙏 👀*समावेशी शिक्षा का आधार*👀 (Basics of Inclusive education) ✨समावेशी शिक्षा मे ऐसी व्यवस्था की जाती है जिससे शिक्षा समुदाय के रुप में होती है,और पूरा समुदाय एक साथ सीखता है,💫 विशिष्ट आवश्यकताओं वाला बच्चा भी उस समुदाय का हिस्सा होता है। ✨ समावेशी शिक्षा दूसरा आधार यह रहता है कि प्रत्येक बालक स्वभाविक रुप से सीखने के लिए अभिप्रेरित रहता है, यदि वह अभिप्रेरित नहीं है तो अभिप्रेरित करना आवश्यक है, 👀 यह तभी संभव है जब उनके आवश्यकताओं की पूर्ति , 👀 उनकी आवश्यकता अनुसार वातावरण हो, 👀 उचित आधार भी आवश्यक है क्योंकि तभी बच्चा सीख सकेगा (क्योकि अनुकूल वातावरण किसी दृष्टिबाधित बच्चे को कक्षा में पीछे बैठाकर शिक्षण देने पर बच्चा नहीं सीख सकेगा, अतः उचित वातावरण के बावजूद सीखना असफल रहा)और कक्षा में अपना स्थायित्व बना सकेगा। 💫कक्षा में सभी बच्चों के शैक्षिक गुणवत्ता मे बिना किसी भेदभाव के सुधार लाना । ✨✨👀We don’t loose their quality due to basis of their disability.👀👀 💫 बच्चों की विशेष आवश्यकताओं के अनुसार बच्चे के सीखने के तरीके में विविधता होती है, जो निम्नलिखित हैं÷ 🧠अनुभवो के द्वारा सीखना 🧠अनुकरण के द्वारा सीखना 🧠 चर्चा परिचर्चा के द्वारा सीखना(Learning by debate/communication) 🧠 विचार-विमर्श के द्वारा सीखना 🧠प्रश्नो के माध्यम से सीखना(Learning by questions-answer mode) 🧠 कुछ बालक शब्दो, वाक्यो को सुनकर भी सीख सकते है। 🧠आत्म चिंतन,मनन के द्वारा सीखना(Learning by self thinking,) 🧠 खेल-कूद क्रियाकलाप के द्वारा सीखना 🧠स्वंय की गतिविधियों के द्वारा सीखना ✨सभी बालको को प्रत्येक प्रकार के अवसर प्रदान करना चाहिए क्योंकि सभी बच्चों में सभी गुण विद्यमान होते हैं, किंतु किसी में कोई गुण ज्यादा होता हैं तो किसी में कोई दूसरा गुण (जिन गुणों का प्रयोग निरंतर नहीं किया जाता वे गुण क्षीण हो जाते हैं) ✨बालको को सिखाने से पूर्व सीखने सिखाने के लिए तत्पर करना आवश्यक होता है, जिसके लिए सीखने के अनुकूल, शुद्ध सकारात्मक युक्त वातावरण करने की आवश्यकता है। ✨ बालक उन्ही सीखी हुई बातों के साथ समन्वय स्थापित कर पाता है,जिनके बारे में उसने अपने परिवेश के कारण भलिभाँति प्रकार से समझ विकसित की हुई है। ✨ सीखने की प्रक्रिया विघालय के साथ – साथ विद्यालय के बाहर भी चलती रहती है, इसलिए सीखने की प्रक्रिया इस प्रकार व्यवस्थित करे की बच्चा पूर्ण रूप से सम्मिलित हो जाएं और उसके बारे में उसके आधार पर समझ विकसित करे। ✨सीखने सिखाने की प्रक्रिया आरंभ करने से पहले बालक के “सांस्कृतिक”; “सामाजिक”; “भौगोलिक”;”राजनीतिक”; परिप्रेक्ष्य को जानना समझना जरूरी है।। ✨प्रत्येक बालक की विविधता के प्रति आदर का भाव रखना चाहिए।। 💫💫💫 समावेशी शिक्षा का क्रियान्वयन 💫💫💫 👀 इस क्रियान्वयन के निर्णय को 5 प्रकार से लिया गया है,जो निम्नलिखित हैं÷ 🧠1 ÷ विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों को कम उम्र में ही ,(जन स्वास्थ्य केंद्र) एवं (एकीकृत बाल विकास केन्द्र) में पहचान कर सम्मिलित कराना। 🧠2÷ जहां तक संभव हो सके विशिष्ट आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा प्रदान की जाए‌। 🧠 3÷ विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों को आवश्यक सहायक सामग्री उपलब्ध कराई जाए । 🧠4÷ सहायक सेवाएं दी जाएं, जो निम्नलिखित है÷ 👀 स्वस्थ बाधारहित वातावरण, 👀 संसाधन पूर्ण कक्षाएं दी जाएं, 👀 विशेष पाठ्यसामाग्री उपलब्ध कराई जाए, 👀 विशेष कक्षा तकनीकी का प्रयोग किया जाए, 👀 उपचारात्मक शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाए, 🧠5÷समय -समय पर शिक्षण -प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए जाते रहें जिससे विशिष्ट शिक्षण के लिए विशिष्ट शिक्षक तैयार किये जा सके।। 👀🙏🙏Thank you so much 🙏🙏👀 🌷समावेशी शिक्षा के 🌷 आधार समावेशी शिक्षा को निम्नलिखित आधारों पर समझा जा सकता है :- 1. समावेशी शिक्षा समुदाय के रूप में होती है , पूरा समुदाय एक साथ सीखता है और विशेष आवश्यकता वाला बच्चा भी उस समुदाय का सदस्य होता है। [सभी बच्चे एक समुदाय (Group) में रहते हुये सीखते हैं, तथा बो उस समुदाय के सदस्य भी होते हैं।] 2. प्रत्येक बालक स्वाभाविक रूप से सीखने के लिए अभिप्रेत रहता है। प्रत्येक बच्चे में स्वाभाविक रूप से अभिप्रेरित होकर सीखने का गुण होता है । अतः शिक्षक को यही समझकर बच्चे को शैक्षिक वातावरण उपलब्ध करना चाहिये ताकि बच्चे उस वातावरण से अभिप्रेरित होकर सीख सकें। 3. कक्षा के सभी बच्चों के शैक्षणिक गुणवत्ता में बिना किसी भेदभाव के सुधार लाना है। जैसे यदि कोई बच्चा शारिरिक रूप से विकलांग है तो शिक्षक ये नहीं कह सकते कि इसकी विकलांगता के कारण ये नहीं सीख सकता या इसकी अक्षमता के कारण इसका बेहतर शैक्षिक परिणाम नहीं आ सका, बल्कि एक शिक्षक की जिम्मेदारी और कर्त्तव्य भी होता है कि वह बच्चों की कमी को सुधार कर उन्हें सामान्य की श्रेणी लायें। 4. बच्चों के सीखने के तौर तरीकों में विविधता (भिन्नता) होती है। जैसे :- 👉अनुभवों के द्वारा 👉अनुकरण के द्वारा 👉चर्चा (बातचीत) के द्वारा 👉प्रश्न पूछ कर 👉सुनकर सीखना 👉चिंतन , मनन के द्वारा 👉क्रीड़ा, खेल क्रियाकलाप के द्वारा 👉खुद गतिविधि करके अर्थात हर बच्चे के सीखने में भिन्नता होती है, अतः एक शिक्षक , बच्चों को इस प्रकार के विभिन्न तरीकों से सीखने, सिखाने का अवसर दें तो हर बच्चा बेहतर तरीके से सीख सकता है। 5. बालकों के सीखने से पूर्व उन्हें सीखने – सिखाने के लिए तैयार करना आवश्यक है , उसके लिए सकारात्मक वातावरण निर्माण करने की भी आवश्यकता होती है। शिक्षक को बच्चों को शिक्षा देने से पूर्व ऐसा वातावरण व्यवस्थित करना जरूरी है जिसमें बच्चे रुचि लें , जिज्ञासु बने रहें और मनोरंजक ढंग से सीख सकें। 6. बालक उन्हीं सीखी हुई बातों के साथ अपना संबंध स्थापित कर पाता है जिनके बारे में उसके अपने परिवेश के कारण उसमें भली-भांति संबंध विकसित हुआ हो। जैसे बालक को उनके वास्तविक जीवन के पुराने अनुभव, स्मृतियों से जोड़कर पढ़ायेंगे तो प्रत्येक बच्चा जल्दी और बेहतर ढंग से सीख सकेगा। 7. सीखने की प्रक्रिया विद्यालय के साथ साथ विद्यालय के बाहर भी चलती रहती है इसलिए इसे ऐसे व्यवस्थित करें कि बच्चा पूर्ण रूप से सम्मिलित हो जाए और उसके बारे में अपने आधार पर अपनी समझ विकसित कर सके। अतः बच्चा सिर्फ विद्यालयी परिवेश में ही न सीखकर बल्कि अपने वातावरण के चहुँओर परिवेश से सीखता है इसीलिए बच्चे के सीखने के लिए सकारात्मक परिवेश विकसित करना चाहिये जिसमें वो सरलतापूर्वक समायोजित होकर सीख सके। 8. सीखने – सिखाने की प्रक्रिया आरंभ करने से पूर्व बालक के सांस्कृतिक , सामाजिक , आर्थिक ,भौगोलिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य को जानना जरूरी है। अतः शिक्षक को बच्चे के इन सभी पहलुओं के बारे जानना जरूरी है ताकि वो बच्चों को बेहतर तरीके से समझकर सरलता से शिक्षा दे सकें। 9. प्रत्येक बालक की विविधता का आदर करना चाहिए। अर्थात हर बच्चे में कोई न कोई भिन्नताएं जरूर पायीं जातीं हैं अतः शिक्षक को उनकी भिन्नताओं के आधार पर भेदभाव न करके बल्कि उनकी भिन्नताओं का आदर करना चाहिये। 🌷समावेशी शिक्षा का🌷 क्रियान्वयन 1. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की कम उम्र में ही “जन स्वास्थ्य केंद्र” एवं “एकीकृत बाल विकास केंद्र” के माध्यम से पहचान की जाए। 2. जहां तक हो सके विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा दी जाए। 3. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को आवश्यक सहायक सामग्री और उपकरण उपलब्ध कराए जाएं। 4. सहायक सेवाएं दी जाएं जैसे :- 👉स्वस्थ बाधा रहित वातावरण उपलब्ध कराया जाए 👉संसाधन कक्ष उपलब्ध कराए जाएं 👉विशेष पाठ सामग्री उपलब्ध कराई जाए 👉विशेष शिक्षण तकनीकी उपलब्ध कराई जाए 👉उपचारात्मक शिक्षण सामग्री उपलब्ध कराई जाए। 5. विशेष शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं। Notes by 🌹जूही श्रीवास्तव🌹 समावेशी शिक्षा के आधार 1.समावेशी शिक्षा समुदाय में होती है पूरा समुदाय एक साथ सीखता है और विशेष आवश्यकता वाला बच्चा भी उस समुदाय का सदस्य होता है 2.प्रत्येक बालक स्वभाविक रूप से सीखने के लिए अभिप्रेरित रहता है 3.कक्षा के सभी बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में बिना किसी भेदभाव के सुधार लाना है (यहां शिक्षक को बच्चे की पृष्ठभूमि से कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए कि वह उच्च आर्थिक पृष्ठभूमि का है या कि वह निम्न आर्थिक पृष्ठभूमि का है, कि वह अनुसूचित जनजाति का है या अनुसूचित जाति का है इससे उसका कोई संबंध नहीं होना चाहिए उसे तो केवल शिक्षा देने से मतलब होना चाहिए ।उसका बालकों को शिक्षा देने में कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए। हां लेकिन शिक्षक को बालक की सामाजिक ,आर्थिक ,भौगोलिक पृष्ठभूमि सभी बातों का ज्ञान होना आवश्यक है ।इससे वह बालको बेहतर रूप से शिक्षा दे सकता है।) 4.बच्चे के सीखने के तौर तरीके में विविधता होती है 👉अनुभव के द्वारा 👉अनुकरण के द्वारा 👉चर्चा करके या बातचीत या विचार विमर्श करके सीखता है 👉प्रश्न पूछने के द्वारा 👉सुनकर 👉चिंतन मनन के द्वारा 👉खेल क्रियाकलाप से 👉खुद गतिविधि करके सिखते है। सभी बालक को हर तरह के अवसर प्रदान करना चाहिए। 5. बच्चों को सिखने से पूर्व सिखने -सिखाने के लिए तैयार करना आवश्यक है इसके लिए सकारात्मक वातावरण का निर्माण करने की आवश्यकता है 6. बालक उन्ही बातों के साथ अपना संबंध स्थापित कर पाता है जिसके बारे में उसको अपने परिवेश के कारण भली-भांति समझ विकसित हुई है (बालक अपने प्रत्यक्ष देखी हुई चीजों से जल्दी सीखता है उससे अपने मस्तिष्क में समझ बनाता है) 7. सिखने की प्रक्रिया विद्यालय के साथ -साथ विद्यालय के बाहर भी चलती रहती है इसलिए इसे ऐसे व्यवस्थित करें कि बच्चा पूर्ण रूप से इसमें सम्मिलित हो जाए और उसके बारे में अपने आधार पर अपनी समझ विकसित करें 8. सिखने -सिखाने की प्रक्रिया आरंभ करने से पूर्व किसी बच्चे की सामाजिक ,आर्थिक ,भौगोलिक ,राजनीतिक, सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य को जानना जरूरी या आवश्यक है (एक शिक्षक को बालक की कमजोरी और उसकी ताकत का पता होना चाहिए) 9. प्रत्येक बालक की विविधता का आदर करना चाहिए (शिक्षक व्यक्तिगत विभिन्नता का सम्मान करना चाहिए) समावेशी शिक्षा का क्रियान्वयन 1. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को कम उम्र में ही जन स्वास्थ्य केंद्र और एकीकृत बाल विकास केंद्र के माध्यम से पहचान की जानी चाहिए 2. जहां तक हो सके विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य बच्चों की शिक्षा दी जाए 3. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को आवश्यक सामग्री और उपकरण उपलब्ध करवाए जाए 4. सहायक सेवा दी जाए 👉स्वास्थ्य बाधा रहित वातावरण का निर्माण किया जाए 👉 संसाधन कक्ष दिया जाए 👉 विशेष पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जाए 👉विशेष शिक्षण तकनीक का उपयोग किया जाए 👉उपचारात्मक शिक्षण सामग्री का प्रयोग किया जाए 5.शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम का उपयोग किया जाना चाहिए। Notes by Ravi kushwah 💫समावेशी शिक्षा के आधार💫 1️⃣ समावेशी शिक्षा समुदाय के रूप में होती है पूरा समुदायपूरा समुदाय एक साथ सीखता है और विशेष आवश्यकता वाला बच्चा भी उसी समुदाय का सदस्य होता है। 2️⃣ प्रत्येक बालक स्वाभाविक रूप से सीखने के लिए अभिप्रेरित रहता है। 3️⃣ कक्षा की सभी बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में बिना भेदभाव के सुधार लाना है। 4️⃣ बच्चे की सीखने के तौर तरीके में विविधता होती हैं। बालक अनुभवों के द्वारा अनुकरण के द्वारा, चर्चा के द्वारा ,प्रश्न पूछ कर, सुनकर, चिंतन मनन से, खेल क्रियाकलाप से तथा खुद गतिविधि करके सीखता है शिक्षक को बालक को सिखाने के लिए सभी बालक को हर तरह के अवसर उपलब्ध कराने चाहिए। 5️⃣ बालक व शिक्षक को सीखने से पूर्व सीखने सिखाने के लिए तैयार रहना आवश्यक है इसके लिए हमें सकारात्मक वातावरण निर्माण करने की आवश्यकता है। 6️⃣बालक उन्हीं सीखी हुई बातों के साथ अपना संबंध स्थापित कर पाता है जिसके बारे में उसके अपने परिवेश के कारण भली-भांति समझ विकसित हुई है। 7️⃣ सीखने की प्रक्रिया विद्यालय के साथ साथ विद्यालय के बाहर भी चलती रहती है इसीलिए इसे ऐसी व्यवस्थित करें कि बच्चा पूर्ण रुप से सम्मिलित हो जाए और उसके बारे में अपने आधार पर अपनी समझ विकसित करें। 8️⃣सीखने सिखाने की प्रक्रिया प्रारंभ करने से पूर्व बच्चे के सामाजिक सांस्कृतिक आर्थिक भौगोलिक और राजनीतिक परिपेक्ष को जानना जरूरी है। 9️⃣ प्रत्येक बालक की विविधता का आदर करना चाहिए। ♦️ समावेशी शिक्षा का क्रियान्वयन♦️ 1️⃣विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की कम उम्र में ही जन स्वास्थ्य केंद्र या एकीकृत बाल विकास केंद्र के माध्यम से पहचान की जाए। इससे बालक का सही उपचार हो सकेगा तथा कम उम्र में ही हमें उसकी कमियों के बारे में पता चल जाएगा जिसे सुधारना आसान होगा यदि उम्र बढ़ जाएगी तो उसे सुधारना उतना आसान नहीं होगा जितना कम उम्र में। 2️⃣ जहां तक हो सके विशेष आवश्यकता वाले बालकों को सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा दी जाए।विशेष बालक सामान्य बालकों के साथ सामंजस्य स्थापित करने की कोशिश करेगा 3️⃣विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को आवश्यक सहायक सामग्री और उपकरणों की सहायता से शिक्षा दी जाए। 4️⃣ सहायक सेवा की जाए जैसे स्वस्थ वातावरण, संसाधन कक्ष, विशेष पाठ्य सामग्री, विशेष शिक्षण तकनीक, उपचारात्मक शिक्षण सामग्री आदि के माध्यम से बालक को शिक्षा दी जाए। 5️⃣ विशेष आवश्यकता वाले बालकों के लिए शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाएं ताकि बालक इन प्रशिक्षण को प्राप्त करके सामान्य बालक की श्रेणी में आ सके। 👉🏻Notes by-Raziya khan *समावेशी शिक्षा के आधार* 1️⃣ समावेशी शिक्षा समुदाय के रूप में होती है पूरा समुदाय एक साथ सीखता है और विशेष आवश्यकता वाला बच्चा भी उस समुदाय का सदस्य होता है। 2️⃣ प्रत्येक बालक स्वाभाविक रूप से सीखने के लिए अभिप्रेरित रहता है। 3️⃣ कक्षा के सभी बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में बिना किसी भेदभाव के सुधार लाना है। 4️⃣ बच्चे के सीखने के तौर तरीके में विविधता होता है। और यह विविधता इस प्रकार से है➖ 👉🏻 अनुभवों के द्वारा 👉🏻 अनुकरण के द्वारा 👉🏻 चर्चा के द्वारा (बातचीत) 👉🏻 प्रश्न पूछना 👉🏻 सुनकर सीखना 👉🏻 चिंतन मनन से सीखते हैं। 👉🏻 खेल क्रियाकलाप से सीखता है। 👉🏻 खुद गतिविधि करके (करके सीखना) 👉🏻 सभी बालक को हर तरह के समुचित अवसर प्रदान करना चाहिए। 5️⃣ बालक को सीखने के पूर्व सीखने-सिखाने के लिए तैयार करना आवश्यक है, उसके लिए सकारात्मक वातावरण निर्माण करने की आवश्यकता है। 6️⃣बालक उन्हीं सीखी हुई बातों के साथ संबंध स्थापित कर पाता है जिनके बारे में उसके अपने परिवेश के कारण भली-भांति समझ विकसित हुई हो। 7️⃣सीखने की प्रक्रिया विद्यालय के साथ-साथ विद्यालय के बाहर भी चलते रहती है इसलिए इसे ऐसे व्यवस्थित करें कि बच्चा पूर्ण रूप से सम्मिलित हो जाए और उसके बारे में अपने आधार पर अपनी समझ विकसित करें। 8️⃣ सीखने-सिखाने की प्रक्रिया आरंभ करने से पूर्व बच्चे के सामाजिक, सांस्कृतिक, आर्थिक ,भौगोलिक और राजनैतिक ,परिप्रेक्ष्य को जानना जरूरी है। 9️⃣ प्रत्येक बालक की विविधता का आदर करना। (जैसा कि हम जानते हैं कि प्रत्येक बालक में विभिन्न प्रकार की विविधताएं होती हैं कोई बच्चा जल्दी सीख जाता है तो कोई बच्चा धीरे सीखता है) *समावेशी शिक्षा का क्रियान्वयन*➖ 🍃विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की कम उम्र में ही जन स्वास्थ्य केंद्र, एकीकृत बाल विकास केंद्र के माध्यम से पहचान की जाए। 🍃🍂 जहां तक हो सके विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को ,सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा दी जाए। 🍃🍂विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को आवश्यक सहायक सामग्री और उपकरण उपलब्ध कराई जानी चाहिए। 🍃🍂 सहायक सेवा दी जाए विभिन्न प्रकार से बच्चों को सहायक सेवा दी जा सकती है जो इस प्रकार से है➖ 👉🏻 स्वस्थ बाधा रहित वातावरण 👉🏻 संसाधन कक्ष की उपलब्धता 👉🏻 विशेष पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जाए। 👉🏻 विशेष शिक्षण तकनीक अपनाई जाए। 👉🏻 उपचारात्मक शिक्षण सामग्री 👉🏻 शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम चलानी चाहिए। 🍃🍂 *Notes by manisha gupta* 🍂🍃 🌈🔥समावेशी शिक्षा के आधार– 1️⃣🌺समावेशी शिक्षा समुदाय के रूप में होती है। पूरा समुदाय एक साथ सीखता है और विशेष आवश्यकता वाले बालक भी उस समुदाय का सदस्य होता है। (यानी हम कह सकते हैं कि समावेशी शिक्षा के अंतर्गत बालक एक ग्रुप में सीखते हैं चाहे बच्चा विशेष आवश्यकता वाले हो या समान्य बच्चा हो।) 2️⃣🌸प्रत्येक बालक स्वाभाविक रूप से सीखने के लिए अभी प्रेरित रहता है (बालक में जन्म से मृत्युपरांत तक सिखने की प्रवृत्ति होती हैं बच्चे हमेशा कुछ न कुछ सिखते रहते हैं।) 3️⃣🌺कक्षा के सभी बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता में बिना किसी भेद-भाव के सुधार लाना है। 4️⃣🌺बच्चे के सीखने के तौर तरीके मैं विविधता होती है जो नीचे दिए गए हैं- 💥बच्चा अनुभव के द्वारा सीखता है। 💥कोई बच्चा अनुकरण करके ज्यादा सीखते हैं। 🔥कुछ बच्चे प्रश्न पूछना और दूसरे प्रश्न के उत्तर देना ऐसा करने से बच्चा जल्दी सीखते हैं। 🔥कुछ बच्चे सिर्फ सुनकर सीख लेते हैं 🔥बहुत बच्चे चिंतन मनन से सीखते हैं। 💥बहुत बच्चे खेल -खेल से सीखते हैं। चाहे कोई भी खेल जैसे -क्रिकेट वॉलीबॉल फुटबॉल इत्यादि। अनेक प्रकार के खेल के माध्यम से सीखते हैं। 🌿💥 कुछ बच्चे खुद गतिविधि करके सीखते हैं अतः प्रत्येक बच्चे के सीखने सिखाने के हर तरह के अवसर प्रदान करना चाहिए। 5️⃣सीखने से पूर्व सीखने सिखाने के लिए तैयार करना आवश्यक है, उसके लिए सकारात्मक वातावरण निर्माण करने की आवश्यकता है ताकि बच्चे उपयुक्त वातावरण से जल्दी सीख जाए। 6️⃣🌿बालक उन्हीं सीखी बातों के साथ अपना संबंध स्थापित कर पाता है जिनके बारे में उसके अपने परिवेश के कारण भली- भांति संबंध विकसीत हुई हों। 7️⃣💥सीखने की प्रक्रिया विद्यालय के साथ साथ विद्यालय के बाहर भी चलते रहती है। इसलिए इसे ऐसा व्यवस्थित करें कि बच्चा पूर्ण रूप से सम्मानित हो जाए और अपने आधार पर अपनी समझ विकसित करते हैं। 8️⃣🔥सीखने सिखाने की प्रक्रिया आरंभ करने से पूर्व बच्चे के सामाजिक, सांस्कृतिक आर्थिक ,भौगोलिक और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य को जानना जरूरी है। शिक्षक को बच्चे का हर एक पहलू को ध्यान में रखना चाहिए । 9️⃣💥प्रत्येक बालक की विविधता का आदर करना चाहिए। (चाहे बच्चा किसी भी धर्म या जाति अथवा लिंग से संबंध रखता हो।) 🌈🌺🌿समावेशी शिक्षा का क्रियान्वन🌿🌺🌈 💥🌺विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के कम उम्र में ही- ➡️ जन स्वास्थ्य केंद्र। ➡️ एकीकृत बाल विकास केंद्र। के माध्यम से पहचान की जाए। 🌻जहां तक संभव हो सके विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को समान्य बच्चों के साथ शिक्षा दी जाए। ➡️🌻विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को आवश्यक सामग्री और उपकरण उपलब्ध कराई जाए। 🌿🌸सहायक सेवा दी जाए-स्वस्थ्य वाधा रहित वातावरण उपलब्ध कराई जाए। 🌿🌸उपयुक्त संसाधन एवं कक्षा दी जाए। 💥🌺विशेष पाठ्यक्रम, सामग्री उपलब्ध की जाए। 🌻🌿विशेष शिक्षण तकनीक उपलब्ध कराई जाए। 🔥💥उपचारात्मक शिक्षण सामग्री का पूर्ण व्यवस्था की जाए। 🌸🌺शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जाए। ताकि बच्चों को भलीभांति समझ सकें, जान सकें। 🌈🌸💥🌺🙏Notes by-SRIRAM PANJIYARA 🌈🌸💥🌺🙏 🔆 *समावेशी शिक्षा के आधार* ➖ 🎯 समावेशी शिक्षा समुदाय के रूप में होती है पूरा समुदाय एक साथ सीखता है और विशेष आवश्यकता वाले बच्चा भी उस समुदाय का सदस्य होता है | अर्थात जिस विद्यालय में बच्चा पढ़ता है वह भी एक समुदाय ही है या जिस संगठन में हम रहते हैं वह भी समुदाय है जिसके हम सदस्य होते हैं | 🎯 समावेशी शिक्षा में प्रत्येक बालक स्वभाविक रूप से सीखने के लिए अभिप्रेरित रहता है | और समावेशी शिक्षा का यह आधार होना चाहिए और यदि नहीं है तो एक शिक्षक को अभिप्रेरित करना चाहिए और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को अभिप्रेरित करके सीखने के लिए तत्पर करना चाहिए, क्योंकि वह सीख सकता है यदि उनके लिए उचित आधार हो उनकी आवश्यकता के अनुसार हो तभी समावेश शिक्षा सफल होगी | 🎯 कक्षा में सभी बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में बिना किसी भेदभाव के सुधार लाना है और यही समावेशी शिक्षा का मूल आधार है | यदि किसी को समस्या है तो निदान करके शिक्षा देना है ना कि उसको अलग करके पढ़ाना है सब को साथ में ही शिक्षा देना है | 🎯 बच्चे के सीखने के तौर तरीके में विभिन्नता होती है वह ➖ *1* अनुभवों के द्वारा सीखते हैं | *2* अनुकरण करके भी सीखता है | *3* चर्चा करके या बातचीत करके भी सीख सकता है | *4* प्रश्न पूछने से भी सीख सकते हैं | *5* सुनकर भी सीख सकते हैं | *6* कई बच्चे चिंतन करके भी सीखते हैं ऐसे बच्चों को अकेले में समय चाहिए | *7* कई बच्चे खेल क्रियाकलापों से भी सीख सकते हैं जब तक कि वे खेलेंगे नहीं सीखेंगे नहीं ऐसे बच्चों के लिए खेल बहुत आवश्यक हैं | *8* कई बच्चे खुद गतिविधि करके भी सीखते हैं | इसलिए सभी बच्चों को हर प्रकार से शिक्षा देनी चाहिए जो की प्रजातांत्रिक शिक्षा होगी | 🎯 बालकों को सीखने से पूर्व सीखने सिखाने के लिए तैयार करना आवश्यक होता है जो कि एक बेहतर वातावरण देकर या सकारात्मक वातावरण प्रदान करके किया जा सकता है | अर्थात् इसके लिए सकारात्मक वातावरण निर्माण करने की आवश्यकता है | 🎯 बालक उन्हीं सीखी हुई बातों के साथ समन्वय स्थापित कर पाता है जो उसने अपने वातावरण से प्राप्त किया है | अर्थात बालक उन्हीं सीखी हुई बातों के साथ अपना संबंध स्थापित कर पाता है जिसके बारे में उसके अपने परिवेश के कारण भली-भांति समझ विकसित हुई हो | लेकिन जब बच्चा धीरे-धीरे परिपक्व होता है तो वह उसकी अपनी समझ बन जाती है | 🎯 सीखने की प्रक्रिया विद्यालय के साथ साथ विद्यालय के बाहर भी चलती रहती है इसलिए इसे ऐसे व्यवस्थित करें कि बच्चा पूर्ण रूप से सम्मिलित हो जाए और उसके बारे में अपने द्वारा अपने आधार पर अपनी समझ विकसित कर सकें | 🎯 सीखने सिखाने की प्रक्रिया आरंभ करने से पूर्व किसी बच्चे का सामाजिक, सांस्कृतिक, भौगोलिक, आर्थिक या राजनीतिक परिप्रेक्ष्य को जानना बहुत आवश्यक है | यदि ऐसा नहीं हुआ तो बच्चे के मन में हीन भावना का विकास होने लगेगा | 🎯 प्रत्येक बालक की विविधता का आदर करना चाहिए | सबकी अलग-अलग व्यक्तिगत विभिन्नता होती है उस को ध्यान में रखना चाहिए और उसके अनुसार शिक्षा प्रदान करना चाहिए | अर्थात् जो जिस परिवेश में है उसके अनुसार शिक्षा दें और उनका सम्मान करना चाहिए | 🔆 *समावेशी शिक्षा का क्रियान्वयन* ➖ समावेशी शिक्षा की मुख्यधारा से कोई भी विशेष बच्चा छूट ना जाए इसके लिए कुछ विशेष निर्णय लिए गए जो कि निम्न है ➖ 🎯 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की कम उम्र में ही जन स्वास्थ्य केंद्र या एकीकृत बाल विकास केंद्र के माध्यम से पहचान की जाए | यह केंद्र व्यवस्थित करता है कि यह सामान्य नहीं है या नहीं इसलिए उनकी पहचान की जा सकती है | 🎯 जहां तक हो सके विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा दी जाए | 🎯 विशेष आवश्यकता वाले बच्चे कको आवश्यक सहायक सामग्री तथा उपकरण प्रदान कराए जाए | 🎯 सहायक सेवा दी जाएं जैसे ➖ *1* स्वास्थ्य बाधा रहित वातावरण | *2* संसाधन कक्ष दिए जाएं | *3* विशेष पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जाए जो सहायक हो जैसे गेंद और इसलिए आदि | *4* विशेष शिक्षा तकनीकी बनाई जाए | 🎯 हर शिक्षक इसके लिए सक्षम नहीं है इसलिए विशेष शिक्षक प्रशिक्षण कार्यक्रम की व्यवस्था की जाना चाहिए ताकि वह उनकी आवश्यकता की अनुसार शिक्षा दे सकें | *नोट्स बाय➖ रश्मि सावले* 🌻🌺🌸🍀🍀🍀🍀🍀🍀🍀🌸🌺🌻 🌟❄️🌟समावेशी शिक्षा के आधार❄️🌟❄️ 1- समावेशी शिक्षा समुदाय में होती है पूरा सामुदाय एक साथ सीखता है और विशेष आवश्यकता वाला बच्चा भी उस समुदाय का सदस्य होता है 2- प्रत्येक बालक स्वभाविक रूप से सीखने के लिए प्रेरित रहता है 3- कक्षा के सभी बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में बिना किसी भेदभाव के सुधार लाना है शिक्षक को बच्चे की पृष्ठभूमि से कोई लेना-देना नहीं होना चाहिए किसी भी जाति वर्ग से संबंध नहीं होना चाहिए केवल शिक्षा देने से मतलब होना चाहिए यही एक अच्छे शिक्षक का कर्तव्य है बालक के सामाजिक आर्थिक भौगोलिक पृष्ठभूमि इन सभी बातों की जानकारी होना चाहिए और सभी बच्चों को सम्मान और बेहतर शिक्षा देना चाहिए 4- बच्चे के सीखने के तौर तरीके में विभिन्नता पाई जाती है ✍🏻 अनुभव के द्वारा/ बच्चा अपने अनुभव के द्वारा भी सीख सकता है जैसे-जैसे अनुभव होता जाता है वैसे वैसे जीता जाता है ✍🏻 अनुकरण के द्वार/ बच्चा दूसरों को देख कर सीखता है ✍🏻 चर्चा करके या बातचीत या विचार-विमर्श करके सीखना ✍🏻 प्रश्न द्वारा ✍🏻 सुनकर ✍🏻 चिंतन मनन के द्वारा ✍🏻 खेल क्रियाकलाप से ✍🏻 खुद गतिविधि करके सीखते हैं 5- बच्चों को सीखने से पूर्व सीखने सिखाने के लिए तैयार करना आवश्यक है इसके लिए सकारात्मक वातावरण का निर्माण करने की आवश्यकता है 6- बालक उन बातों के साथ अपना संबंध स्थापित कर पाता है जिसके बारे में उसको अपने परिवेश के कारण भली-भांति समझ विकसित हुई है 7- सीखने की प्रक्रिया विद्यालय के साथ साथ विद्यालय के बाहर भी चलती रहती है इसलिए इसे इस तरह से व्यवस्थित करें कि बच्चा पूर्ण रूप से इस में सम्मिलित हो जाए और उसके बारे में अपने आधार पर अपनी समझ विकसित करें 8 – सीखने सिखाने की प्रक्रिया आरंभ करने से पूर्व किसी बच्चे की सामाजिक आर्थिक भौगोलिक राजनीतिक सांस्कृतिक परिप्रेक्ष्य को जानना आवश्यक होता है Shikshak के लिए बच्चे की शिक्षा के क्षेत्र में आ रही कठिनाई की जानकारी होना चाहिए 9- प्रत्येक बालक की विविधता का आदर करना चाहिए एक शिक्षक को बालकों में जो विभिन्न ताएं पाई जाती हैं उनका सम्मान करना चाहिए 𓭄️समावेशी शिक्षा का क्रियान्वयन❄️ 1- विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को कम उम्र में ही जन स्वास्थ्य केंद्र और एकीकृत बाल विकास केंद्र के माध्यम से पहचान की जानी चाहिए 2- जहां तक हो सके विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य बच्चों की शिक्षा दी जाए 3- विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को आवश्यक सामग्री और उपकरण उपलब्ध करवाए जाए 4- सहायक सेवा दी जानी चाहिए ✍🏻 स्वास्थ्य बाधा रहित वातावरण का निर्माण किया जाए ✍🏻 संसाधन कक्ष से दिया जाए ✍🏻 विशेष पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई ✍🏻 विशेष शिक्षण तकनीकी का उपयोग किया जाए ✍🏻 उपचारात्मक शिक्षण सामग्री का प्रयोग किया जाए 5- शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम का उपयोग किया जाए ✍🏻रितु योगी✍🏻 ✍️ *समावेशी शिक्षा के आधार* समावेशी शिक्षा के आधार निम्नलिखित हैं:- 1. समावेशी शिक्षा समुदाय के रूप में होती है पूरा समुदाय एक साथ सीखता है और विशेष आवश्यकता वाला बच्चा भी उस समुदाय का सदस्य होता है। 2. प्रत्येक बालक स्वाभाविक रूप से सीखने के लिए भी प्रेरित होता है। 3. कक्षा के सभी बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में बिना किसी भेदभाव के सुधार लाना चाहिए यहां पर शिक्षक को बच्चे की पृष्ठभूमि से कोई मतलब नहीं होना चाहिए वह उच्च आर्थिक पृष्ठभूमि का है या निम्न पृष्ठभूमि से है या अनुचित या अनुसूचित जनजाति का है या सूचित जनजाति का है इससे उनका कोई संबंध नहीं होना चाहिए शिक्षा को बालक की सामाजिक आर्थिक भौगोलिक सभी बातों का ज्ञान होना आवश्यक है इससे बालों को बेहतर रूप में शिक्षा मिल सकती है। 4. बच्चे के सीखने के तौर तरीके में विविधता होती है 🌷 बच्चे अनुभव के द्वारा सीखते हैं। 🌷 बच्चे अनुकरण के द्वारा सीखते हैं। 🌷 बच्चे चर्चा से भी सीखते हैं उनसे बातचीत करने से वह सीखते हैं। 🌷 बच्चे को प्रश्न पूछने का भी मौका देना चाहिए जिससे वह सीखते हैं। 🌷 बच्चे सुनकर भी सीखते हैं। 🌷 बच्चे चिंतन और मनन के द्वारा भी सीखते हैं। 🌷 बच्चे खेल क्रियाकलाप के द्वारा भी सीखते हैं। 🌷 बच्चे खुद गतिविधि करके सीखते हैं। 💎 सभी बालको हर तरह के अवसर प्रदान करने चाहिए जिससे वह सीख सके कुछ ज्ञान प्राप्त कर सके। 5 सीखने से पूर्व सीखने के लिए तैयार करना आवश्यक है इसके लिए सकारात्मक वातावरण निर्माण करने की आवश्यकता है बच्चों पर वातावरण का प्रभाव बहुत होता है जिससे वह सकारात्मक और नकारात्मक के चीजों को वह अनुकरण करते हैं और सीखते हैं। 6. बालक उन्हीं सीखी बातों के साथ अपना संबंध स्थापित कर पाता है जिनके बारे में उसके अपने परिवेश के कारण भली-भांति समझ विकसित हुई है बालक का सही गलत वातावरण के कारण विकसित होती है। बालक के जो सामने होता है जिन्हें वह चीज को देख सकता है उससे वह जल्दी सीखता उस चीज को वह जल्दी ग्रहण करता है। 7. सीखने की प्रक्रिया विद्यालय के साथ साथ विद्यालय के बाहर भी चलते रहते इसलिए ऐसे व्यवस्थित व्यवस्था करें कि बच्चा पूर्ण रूप से संबंधित होना चाहिए और उसके बारे में अपने आधार पर अपनी समझ विकसित हो। 8. सीखने सिखाने की प्रक्रिया आरंभ करने से पूर्व बच्चे के अलग अलग पहलू होते है। सामाजिक सांस्कृतिक आर्थिक भौगोलिक और राजनीतिक परिपेक्षय को जानना जरूरी है तभी उनको हम समझ पाएंगे। 9. प्रत्येक बालक की विविधता का आदर करना चाहिए उनका सम्मान करना चाहिए। ✍️ *समावेशी शिक्षा का क्रियान्वयन* 1. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की कम उम्र में ही जन स्वास्थ्य केंद्र बाल विकास केंद्र के माध्यम से पहचान की जानी चाहिए। 2. जहां तक हो सके विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा दी जाए जिससे उन्हें कठिनाई का सामना ना करना पड़े। 3. विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को आवश्यक सहायक सामग्री और उपकरण कराई जाए। 4. सहायक सेवा दी जाए:- 🌷 स्वस्थ बाधा रहित वातावरण। 🌷 संसाधन कक्षा पढ़ने के लिए जैसे वेंच ब्लैक बोर्ड। 🌷 विशेष पाठ्य सामग्री पढ़ने के लिए खिलौने। 🌷 शिक्षा तकनीक के माध्यम से उन्हें शिक्षा देनी चाहिए। 🌷 उपचारात्मक शिक्षण सामग्री का उपयोग करना चाहिए। 🌷 शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम करवाना चाहिए। Notes By :-Neha Roy 🌸समावेशी शिक्षा के आधार 🌸 ◾ समावेशी शिक्षा समुदाय के रूप में होती है पूरा समुदाय एक साथ सीखता है और विशेष आवश्यकता वाला बच्चा भी उस समुदाय का हिस्सा या सदस्य होता है। ◾ प्रत्येक बालक स्वाभाविक रूप से सीखने के लिए प्रेरित होता है। ◾ कक्षा के सभी बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता में बिना किसी भेदभाव के सुधार लाना है। ◾बच्चे के सीखने के तौर-तरीकों में विविधता होती है जैसे– ▪️अनुभव के द्वारा ▪️अनुकरण के द्वारा ▪️चर्चा (बातचीत) ▪️प्रश्न पूछना ▪️सुनकर ▪️चिंतन मनन ▪️खेल क्रियाकलाप से ▪️खुद गतिविधि करके ▪️सभी बालकों को हर तरह के अवसर प्रदान करने चाहिए ◾सिखने से पूर्व सीखने सिखाने के लिए तैयार करना आवश्यक है इसके लिए सकारात्मक वातावरण निर्माण करने की आवश्यकता है। ◾बालक उन्हीं सीखी बातों के साथ संबंध स्थापित कर पाता है जिनके बारे में उसने अपने परिवेश के कारण भली भांति समझ विकसित हुई है। ◾सीखने की प्रक्रिया विद्यालय के साथ-साथ बाहर भी चलती रहती है इसलिए इसे ऐसे व्यवस्थित करें कि बच्चा पूर्ण रूप से सम्मानित हो जाए और उसके बारे में अपने आधार पर अपनी समझ विकसित कर सके। ◾ सीखने सिखाने की प्रक्रिया आरंभ करने से पूर्व बच्चे के सामाजिक , सांस्कृतिक , आर्थिक , भौगोलिक और राजनीतिक परिपेक्ष्य को जानना जरूरी है। ◾ प्रत्येक बालक की विविधता का आदर करना चाहिए। 🌸 समावेशी शिक्षा का क्रियान्वयन🌸 ◾जितने भी विशेष आवश्यकता वाले बच्चे हैं उनकी कम उम्र में ही जन स्वास्थ्य केंद्र, एकीकृत बाल विकास केंद्र के माध्यम से पहचान की जाए। ◾जहां तक हो सके विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा दी जाए। ◾ विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को सहायक सामग्री और उपकरण उपलब्ध कराई जानी चाहिए। ◾ सहायक सेवा दी जाए जो निम्न हैं — ▪️स्वस्थ बाधा रहित वातावरण ▪️संसाधन कक्ष दिए जाएं। ▪️विशेष पाठ्य सामग्री उपलब्ध कराई जाए जो सहायक हो । ▪️विशेष शिक्षा तकनीकी अपनाई जाए। ▪️उपचारात्मक शिक्षण प्रणाली ◾ शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने चाहिए जिससे बालक इन प्रशिक्षण के माध्यम से सामान्य बालक की श्रेणी में आ सके। धन्यवाद द्वारा वंदना शुक्ला ⭐🍁⭐🍁 समावेशी शिक्षा⭐🍁⭐🍁⭐🍁 🎯 समावेशी शिक्षा समुदाय में होती है पूरा समुदाय एक साथ सीखता है और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे भी उस समुदाय के सदस्य होते हैं 🎯 प्रत्येक बालक स्वाभाविक रूप से सीखने के लिए प्रेरित रहता है 🎯 कक्षा के सभी बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में बिना किसी भेदभाव के सुधार लाना है शिक्षक को बच्चों की पृष्ठभूमि से कोई लेना देना नहीं होना चाहिए वह वह आर्थिक पृष्ठभूमि का है या निम्न आर्थिक अनिष्ट भूमिका या अनुचित या अनुसूचित जनजाति का उससे कोई संबंध नहीं होना चाहिए शिक्षा को बालक की आर्थिक भौगोलिक सभी बातों का ज्ञान होना आवश्यक है इससे बालक को बेहतर रूप से शिक्षा मिल सकते हैं 🎯 बच्चे के सीखने के तौर तरीके में विविधता होती है 🌺 बच्चे अनुभव के द्वारा सीखते हैं 🌺बच्चे अनुकरण के द्वारा सीखते हैं 🌺बच्चे चर्चा में भी सीखते हैं और उनकी से बातचीत करने से भी वह सीखते हैं 🌺 बच्चे को प्रश्न पूछने का मौका देना चाहिए जिससे वह सीखते हैं 🌺बच्चे सुनकर भी सीखते हैं बच्चे चिंतन और मनन के द्वारा भी सीखते हैं 🌺बच्चे खेल प्रक्रिया के द्वारा भी सीखते हैं 🌺बच्चे खुद गतिविधि करके सीखते हैं 🎯 सभी बच्चों को हर तरह के अवसर प्रदान करनी चाहिए जिससे कि वह सिर्फ सके और कुछ ज्ञान प्राप्त कर सकें 🎯 सीखने से फोटो सिखाने के लिए तैयार करना आवश्यक है इसके लिए सकारात्मक वातावरण निर्माण करने की आवश्यकता है बच्चों पर वातावरण का प्रभाव पड़ता है जिससे कि वह सकारात्मक और नकारात्मक चीजों को बाय अनुकरण करते हैं 🎯 बालक उन्हीं की हुई बातों के साथ अपने स्वयं संबंध स्थापित कर पाता है जिनके बारे में उसने अपने परिवेश के कारण भली-भांति समझ विकसित हुई है बालक के जो सामने होता है जिस चीज को वह देखता है उसे आए जल्दी सीख जाता है 🎯 सीखने की प्रक्रिया विद्यालय के साथ साथ विद्यालय के बाहर भी चलते रहना चाहिए इसीलिए ऐसी व्यवस्था करें कि बच्चे पूर्ण रूप से संबंधित सभी जगह से सीख सकें और उसके बारे में अपने आधार पर अपने समाज विकसित हो 🎯 सीखने सिखाने की प्रक्रिया आरंभ करने से पूर्व बच्चे में अलग-अलग पहलू होते हैं सामाजिक पहलू सांस्कृतिक भौतिक आर्थिक राजनैतिक परिपेक्ष्य को जानना जरूरी है तभी हम बच्चे समझ पाएंगे 🎯प्रत्येक बालक के विविधता का आदर करना चाहिए उसका सम्मान करना चाहिए 🍀🌾 समावेशी शिक्षा का क्रियान्वयन🍀🌾 🌈 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की कम उम्र में ही जन स्वास्थ्य केंद्र बाल विकास केंद्र के माध्यम से पहचान की जानी चाहिए 🌈 जहां तक हो सके विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को सामान बच्चों के साथ शिक्षा दी जाए जिससे कि उन्हें कठिनाई का सामना ना करना पड़े 🌈 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को आवश्यक सामग्री और उपकरण उपलब्ध करानी चाहिए 🌈 सहायक सेवाएं दी जाएं ⭐ स्वास्थ्य बाधारहित बाता वातावरण ⭐संसाधन कक्षा पढ़ने के लिए जैसी चेंज और ब्लैक बोर्ड ⭐ विशेष पाठ्यक्रम सामग्री देनी चाहिए ⭐ शिक्षा तकनीकी के माध्यम से उन्हें शिक्षा देनी चाहिए ⭐ उपचारात्मक शिक्षण सामग्री का उपयोग करना चाहिए ⭐ शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम करवाना चाहिए ✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻Menka patel ✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻 🌺🍁🌺🍁🌺🍁🌺🍁🌺🍁🌺🍁🌺🍁🌺🍁🌺🍁🌺🍁🌺🍁🌺🍁 ☘️ ☘️समावेशी शिक्षा के आधार☘️☘️ 🔹 समावेशी शिक्षा समुदाय के रूप में होती है पूरा समुदाय एक साथ सीखता है और विशेष आवश्यकता वाले बच्चे भी उसी समुदाय का सदस्य होता है 🔹 प्रत्येक बालक स्वाभाविक रूप से सीखने के लिए अभिप्रेरित रहता है 🔹 कक्षा के सभी बच्चों की शैक्षणिक गुणवत्ता में बिना किसी भेदभाव के सुधार लाना ही उचित है 🔹 बच्चे के सीखने के तौर तरीके में विभिनता होती है इसलिए सभी बालकों को हर तरह का अवसर प्रदान करना चाहिए ➖ अनुभवों के द्वारा ➖ अनुकरण के द्वारा ➖ चर्चा या बातचीत के द्वारा ➖ प्रश्न पूछ कर ➖ सुनकर ➖ चिंतन मनन द्वारा ➖ खेल क्रियाकलाप द्वारा ➖ खुद गतिविधि करके 🔹 सीखने से पूर्व सीखने सिखाने के लिए तैयार करना आवश्यक है इसके लिए सकारात्मक वातावरण निर्माण करने की आवश्यकता है। 🔹 बालक उन्हीं सीखी हुई बातों के साथ अपना संबंध स्थापित कर पाता है जिनके बारे में उसने अपने परिवेश के कारण भली-भांति समय विकसित की हुई हो। 🔹 सीखने की प्रक्रिया विद्यालय के साथ साथ विद्यालय के बाहर भी चलते रहती है इसलिए इसे ऐसे व्यवस्थित करें कि बच्चा पूर्ण रूप से सम्मानित हो जाए और उसके बारे में अपने आधार पर अपनी समझ विकसित कर सके। 🔹 सीखने सिखाने की प्रक्रिया आरंभ करने से पूर्व बच्चे के सामाजिक ,सांस्कृतिक, आर्थिक, भौगोलिक, और राजनीतिक परिप्रेक्ष्य को जाना बहुत जरूरी होता है। 🔹 प्रत्येक बालक की विविधता का आदर करना चाहिए। ☘️☘️ समावेशी शिक्षा का क्रियान्वयन☘️☘️ 🔹 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की कम उम्र में ही जन्म स्वास्थ्य केंद्र एवं एकीकृत बाल विकास के केंद्र के माध्यम से पहचान की जाए। 🔹 जहां तक हो सके विशेष आवश्यकता वाले बच्चे को सामान्य बच्चों के साथ शिक्षा दी जाए। 🔹 विशेष आवश्यकता वाले बच्चों का आवश्यक सहायक सामग्री और उपकरण की व्यवस्था की जानी चाहिए। 🔹 सहायक सेवा दी जानी चाहिए:- ➖ स्वास्थ्य बाधा रहित वातावरण ➖ संसाधन कक्ष ➖ विशेष पाठ्य सामग्री की व्यवस्था की जाए। ➖ विशेष शिक्षा तकनीकी का उपयोग हो। ➖ उपचारात्मक शिक्षण सामग्री दी जानी चाहिए। 🔹 शिक्षण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया जाना चाहिए ताकि बच्चों में रुचि बरकरार रहे। 🌸🌸🌸Notes By— Abha kumari🌸🌸🌸

By admin

Leave a Reply

Your email address will not be published.