🌹जीन पियाजे
🌹 कोहलबर्ग
🌹वाइगोत्सकी

🌷 मानव के वृद्धि विकास के अलग अलग आयाम है
🌷 जीन पियाजे वाइगोत्सकी संज्ञानात्मक क्षेत्र से जुड़े हैं
🌷 कोहल बर्ग नैतिक विकास की बात करते हैं

🌹 जीन पियाजे का सिद्धांत🌹

:— जीन पियाजे स्विट्जरलैंड के मनोवैज्ञानिक थे
:— अल्फार्ड देने के साथ बुद्धि परीक्षण पर काम शुरू किया था
:— बच्चे के संज्ञानात्मक विकास पर कार्य किया
:— संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत प्रतिपादित किया

(बालक)

(चिंतन) ( खोज)
⬇️
परिपक्वता. + अनुभव
⬇️. ⬇️
Age. Experience

🌷 बालक में वास्तविकता के स्वरूप के बारे में चिंतन करने या खोज करने की शक्ति ना सिर्फ परिपक्वता के स्तर पर निर्भर करती है ना सिर्फ अनुभवों पर बल्कि दोनों में अंतर क्रिया पर निर्भर करती है

🌹 चिंतन करने खोज की शक्ति= परिपक्वता +अनुभव

Age. Experience

2. वस्तु स्थायित्व

7-12. मूर्त चिंतन

🌹संज्ञानात्मक विकास के संप्रत्यय

👉( अनुकूलन):— बालक वातावरण में सामंजस्य स्थापित करने की जन्मजात प्रवृत्ति ही अनुकूलन है
⬇️
↩↪
आत्मसातकरण. समायोजन
⬇️. ⬇️
पूर्व ज्ञान. योजना व्यवहार/
परिवर्तन

🌷 आत्मसातकरण :—जब बालक समस्या समाधान के लिए या वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए पूर्व में सीखी हुई क्रियाओं का सहारा लेता है आत्मसात करण कहलाता

🌷 समायोजन :—पूर्व में सीखी क्रिया काम नहीं आती यहां अपनी योजना व्यवहार में परिवर्तन से नए वातावरण में सामंजस्य स्थापित करते हैं

🌷 सामयधारण अवधारणा:— बच्चा आत्मसात करण और समायोजन के बीच संतुलन स्थापित करता है

🌷 संरक्षण:— वातावरण में परिवर्तन तथा स्थिरता को पहचानने और समझने की क्षमता संरक्षण है

🌷संज्ञानात्मक( मानसिक) संरचना:— मानसिक संगठन +मानसिक क्षमता

🌷मानसिक संक्रिया:— समस्या का समाधान पर चिंतन करना मानसिक संक्रिया करना माना जाता है

🌷 स्कीम्स :—व्यवहार के संगठित पैटर्न जिसको आसानी से दोहराया जा सके वही संगठित पटेल स्कीम्स कहलाता

🌷 स्कीमा:— स्कीमा मानसिक संरचना है जिसका समानीकरण करना है

🌷 विकेंद्रीकरण:— किसी भी वस्तु या चीज के बारे में वास्तविक ढंग से सोचना विकेंद्रीकरण कहलाता है

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

Notes by:—sangita bharti

🌺🌺जीन पियाजे (Jean piaget)लारेंस कोहलबर्ग(Lohrens kohlberg)और वाइगोत्सकी (Vyogatski)🌺🌺

➡️मानव के वृद्धि विकास के अलग-अलग आयाम हैं।
जीन पियाजे/वाइगोत्सकी- संज्ञानात्मक क्षेत्र से जुड़े हैं।
कोहलवर्ग-नैतिक विकास की बात करते हैं।

🌺🌺 जीन पियाजे का सिद्धांत🌺🌺

➡️जीन पियाजे और वाइगोत्सकी संज्ञानात्मक क्षेत्र से जुड़े हैं;

➡️लॉरेंस कोहलबर्ग के नैतिक विकास की बात करते हैं;

➡️जीन पियाजे स्विट्जरलैंड के एक प्रसिद्ध मनोवैज्ञानिक थे;

➡️अल्फ्रेड बिने के साथ बुद्धि परीक्षण भी किया था;

➡️बच्चे के संज्ञानात्मक विकास पर कार्य किया;

➡️संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत प्रतिपादित किया;

➡️बालक में वास्तविकता के स्वरूप के बारे में चिंतन करने या खोज करने की शक्ति, ना सिर्फ परिपक्वता के स्तर पर निर्भर करती है, और ना ही सिर्फ अनुभव पर बल्कि दोनों के अंतः क्रिया पर निर्भर करती है।

➡️चिंतन/खोज की शक्ति=परिपक्वता+अनुभव

🎯🎯संज्ञानात्मक विकास के सम्प्रत्यय🎯🎯

🌈अनुकूलन( Adaptation)( वातावरण के साथ सामान्य स्थापित करने की जन्मजात प्रवृत्ति अनुकूलन है।

🌈आत्मसातकरण(Assimilation) करने जा बालक समस्या समाधान के लिए या वाला लिए वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए पूर्व में सीखी गई क्रियाओ का सहायता लेता है।

🌈 समायोजनAccomodation)÷परिस्थिति के अनुसार तत्काल योजना बनाकर काम करना; इसमें पूर्व सीखी गई क्रिया काम नहीं आती जहां पर अपनी योजना/व्यवहार में परिवर्तन से नये वातावरण में सामंजस्य स्थापित करते हैं।

🌈साम्यधारण(Equilibrium)- साम्यधारण में बच्चा आत्मसातकरण और समायोजन के बीच संतुलन स्थापित करता है।

🌈संरक्षण(Protection)÷
वातावरण में परिवर्तन तथा स्थिरता को पहचानने और समझने की क्षमता को ही संरक्षण कहते हैं।

🌈संज्ञानात्मक संरचना ÷(Cognitive structure) मानसिक संगठन मानसिक क्षमता के बीच संबंध स्थापित करके किया गया कार्य संज्ञानात्मक संरचना कहलाता है।
(मानसिक संगठन+मानसिक क्षमता=संज्ञानात्मक संरचना)

🌈मानसिक संक्रिया (Mental operation)÷ समस्या का समाधान निकालना उस पर चिंतन करना मानसिक संक्रिया करना माना जाता है।

🌈स्कीम्स (Schemes)÷व्यवहार के संगठित पैटर्न जिसको आसानी से दोहरा जा सके वही संगठित पैटर्न स्कीम्स कहलाता है

🌈स्कीमा(Schema) ÷एक ऐसी मानसिक संरचना जिसका सामान्य करण करना है जिस पर कार्य कर सकते हैं स्कीमा कहलाता है ।

🌈विकेंद्रीकरण(Decentralization)÷
किसी भी वस्तु प्रसिद्ध चीज के बारे में वास्तविक ढंग से सोचने समझने की क्षमता ही व्यंजन कहलाता हैं।
Thank you 💞☺️
Notes written by ,➡️ $hikhar pandey

🌈 जीन पियाजे का सिद्धांत🌈

👉🏼जीन पियाजे स्विजरलैंड के मनोवैज्ञानिक थे।
👉🏼 जीन पियाजे अल्फेड बिने के साथ बुद्धि परीक्षण पर काम किया।
👉🏼 जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत का प्रतिपादन किया बालक में वास्तविकता के स्वरूप के बारे में चिंतन करने या खोज की शक्ति ना सिर्फ अनुभवों पर बल्कि दोनों पर होता है

🎯 संज्ञानात्मक विकास के संप्रत्यय➖

🎯 अनुकूलन (Adaptation)
पियाजे के अनुसार बच्चे में अपने आसपास के वातावरण से अंतर क्रिया करने तथा वातावरण के साथ समंजन करने की जन्मजात प्रवृत्ति होती है

🎯 आत्मसात्करण(Assimilation➖
जब बालक समस्या समाधान के लिए या वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए पूर्व में सीखी क्रियाओं का सहारा लेना है

🎯 समायोजन (Accommodation)➖
पूर्व में सीखी क्रिया काम नहीं आती यह अपनी योजना व्यवहार में परिवर्तन से नए वातावरण में सामंजस्य स्थापित करते हैं
इस प्रक्रिया के द्वारा नए स्कीमा कभी विकास होता है

🎯 साम्यधारण (Equilibration)➖

शाम में धारण में बच्चा आत्मसात्करण और समय नियोजन के बीच संसद करने का प्रयास करता है जैसे एक तंत्र के द्वारा प्राप्त किया जाता है इसे ही पियाजे साम्याधारण कहते हैं

🎯 संरक्षण (Conservation)➖
संरक्षण से तात्पर्य वातावरण में परिवर्तन और स्थिति दोनों को पहचानने और समझने की क्षमता तथा किसी वस्तु के रूप रंग में परिवर्तन को उस वस्तु के तत्व में परिवर्तन से अलग करने की क्षमता होती है।

🎯 संज्ञानात्मक संरचना (Cognitive structure)➖
संज्ञानात्मक संरचनाएं एक आधारभूत मानसिक प्रक्रिया के रूप में लोगों द्वारा सूचना या जानकारी की समाज बनाने में अनुपयोगी होती है एक संज्ञानात्मक संरचना में कई मानसिक प्रक्रियाओं का समुच्चय निहित रहता है।

🎯 स्कीम्स (Schemes)➖
इससे दांत पर व्यवहारों के संगठित पैटर्न से है स्कीम्स का संबंध मानसिक संक्रियाओं से होता है।

🎯 स्कीमा (Schema)➖
स्कीमा से तात्पर्य एक ऐसे मानसिक संरचना से ले जाता है जिसका सामान्यीकरण किया जा सके।

🎯 विकेंद्रीकरण (Decentering)➖
किसी भी वस्तु या चीजों के बारे में वास्तविक ढंग से सोचने की क्षमता विकेंद्रीकरण कहलाती है।

🖊️🖊️📚📚 Notes by…….. Sakshi
Sharma📚📚🖊️🖊️

🔆जीन पियाजे कोहलबर्ग, वाइगोत्सकी 🔆

🌀 मानव में वृद्धि विकास के अलग अलग आयाम है।

🌀 जीन पियाजे वाइगोत्सकी संज्ञानात्मक क्षेत्र से जुड़े हैं।

🌀 कोहलबर्ग नैतिक विकास की बातें करते हैं।

🎯जीन पियाजे का सिद्धांत ➖

✨ जीन पियाजे स्विट्जरलैंड के मनोवैज्ञानिक थे ।
✨जीन पियाजे अल्फार्ड विने के साथ बुद्धि परीक्षण पर कार्य किया ।
✨ बच्चों के संज्ञानात्मक विकास पर कार्य किया।
✨जीन पियाजे के संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत प्रतिपादन किया ।
💠बालक में वास्तविकता केजरीवाल स्वरूप के बारे में चिंतन करने की शक्ति ना सिर्फ़ अनुभवों पर, ना सिर्फ परिपक्वता पर आधारित है बल्कि दोनों के अंतः क्रिया पर आधारित है।

बालक

चिन्तन खोज
⬇️ ⬇️

परिपक्वता + अनुभव
⬇️ ⬇️
Age Experience

♨️ चिन्तन करने खोज की शाक्ति = परिपक्वता+अनुभव

Age Experience

2 – वस्तु स्थायित्व

7-12 – मूर्त चिन्तन

♨️ संज्ञानात्मक विकास के संप्रत्यय ➖

💫 अनुकूलन(assimilation)➖
बालक वातावरण में सामंजस्य स्थापित करने की जन्मजात प्रवृत्ति ही अनुकूलन है

⬇️
⏭️ ⏮️

आत्मसातकरण समायोजन

⬇️ ⬇️

पूर्व ज्ञान योजना व्यवहार
/ परिवर्तन

💫 आत्मसातकरण➖
जब बालक के समस्या समाधान के लिए या वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए पूर्व में सीखी गई क्रियाओं का सहारा लेता है आत्मसात करण कहलाता है।

💫 समायोजन ➖
पूर्व में सीखी गई क्रिया काम नहीं आती यहां अपनी योजना व्यवहार में परिवर्तन से नए वातावरण में सामंजस्य स्थापित करते हैं।

💫सामयधारण अवधारणा➖

बच्चा आत्मसात करण और समायोजन के बीच संतुलन स्थापित करता है।

💫 संरक्षण ➖
वातावरण में परिवर्तन तथा स्थिरता को पहचानने और समझने की क्षमता संरक्षण कहलाती है।

💫 संज्ञानात्मक (मानसिक) संरचना ➖
मानसिक संगठन+मानसिक क्षमता

💫 मानसिक संक्रिया➖
समस्या का समाधान पर चिंतन करना मानसिक संक्रिया करना माना जाता है।

💫स्कीम्स➖
व्यवहार के संगठित पैटर्न जिसको आसानी से दोहराया जा सके वही संगठित पैटर्न स्कीम्स कहलाता है।

💫स्कीमा➖
स्कीमा मानसिक संरचना है जिसका सामान्यीकरण करना है।

💫 विकेंद्रीकरण ➖
किसी भी वस्तु या चीज के बारे में वास्तविक ढंग से सोचना विकेंद्रीकरण कहलाता है।

📝 Notes by ➖
✍️ Gudiya Chaudhary

🌼 Jean piaget (जीन पियाजे)
🌼कोहलवर्ग ( kohalberg)
🌼वाइगोत्सकी (vygotsaki)

🌼मानव में वृद्धि विकास के अलग-अलग आयाम हैं
🌼जीन पियाजे/ वाइगोत्सकी– संज्ञानात्मक क्षेत्र से जुड़े हैं
🌼 कोहलवर्ग — नैतिक विकास की बात करते हैं

🌼🌼जीन पियाजे का सिद्धांत🌼🌼
🌼 1.जीन पियाजे स्विजरलैंड के मनोवैज्ञानिक थे
🌼2. अल्फ्रेड बिने के साथ बुद्धि परीक्षण पर कार्य किया
🌼3. बच्चे के संज्ञानात्मक विकास पर कार्य किया
🌼4. संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत प्रतिपादित किया

🌼🌼👉 बालक में वास्तविकता के स्वरूप के बारे में चिंतन करके या खोज करने की शक्ति नासिर परिपक्वता के स्तर पर निर्भर करती है ना सिर्फ अनुभवों पर बल्कि दोनों के अंतः क्रिया पर निर्भर करता है
🌼🌼 चिंतन खोज की शक्ति= परिपक्वता + अनुभव

🌼जब बच्चा 2 साल का होता है तो वस्तु स्थायित्व का गुण आ जाता है
🌼 जब बच्चा 7 से 14 वर्ष का होता है तो वह मूर्ति चिंतन करने लगता है

🌼 संज्ञानात्मक विकास के संप्रतत्य 🌼

🌼1. अनुकूलन ( adaptation) – बालकों में वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने की जन्मजात प्रगति अनुकूलन है
🌼(A) आत्मसात्करण — बालक समस्या समाधान के लिए या वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए पूर्व में सीखी क्रियाओं का सहारा लेता है

🌼(B) समायोजन — पूर्व में सूची क्रियाओं का काम नहीं आती है यहां अपनी योजना व्यवहार में परिवर्तन से नए वातावरण का सामंजस्य स्थापित करते हैं

🌼2. साम्यधारण — साम्यधारण में बच्चे आत्मसात करण और समायोजन के बीच संतुलन स्थापित करता है

🌼3. संरक्षण (protection) -वातावरण में परिवर्तन तथा स्थिरता को पहचाने और समझने की क्षमता संरक्षण है

🌼🌼संज्ञानात्मक संरचना( cognitive structure mental) 🌼🌼
मानसिक संगठन+ मानसिक क्षमता

🌼🌼मानसिक संक्रिया- समस्या का समाधान पर चिंतन मानसिकता करना माना जाता है

🌼🌼स्कीम्स(schemes) -व्यवहार की संगठित पैटर्न ,जिसको आसानी से दोहराया जा सके, वही संगठित पैटर्न स्कीम्स कहलाता है

🌼🌼स्कीमा ( schema) -स्कीमा मानसिक संरचना है जिसका सामान्यकरण करना है

🌼🌼 विकेंद्रीकरण — किसी भी वस्तु या चीज के बारे में वास्तविक ढंग से सोचने की क्षमता विकेंद्रीकरण कहलाती हैं!!!!

🌼🌼🌼🌼

Notes by manjari soni🌼

🔆 जीन पियाजे, कोहलबर्ग, वायोगोत्सकी, ➖

मानव की वृद्धि और विकास के अलग-अलग आयाम हैं मानव की वृद्धि और विकास में वंशानुक्रम तथा वातावरण का गुणनफल है |

मानव की वृद्धि और विकास के संदर्भ में वैज्ञानिकों ने अपने अनुसार कुछ सिद्धांत और नियम दिए |

जिसमें जीन पियाजे और वायोगोत्सकी संज्ञानात्मक क्षेत्र से जुड़े हैं तथा कोहलबर्ग नैतिक विकास की बात करते हैं |

🎯 जीन पियाजे के सिद्धांत➖

विकास के संदर्भ में जीन पियाजे ने अपने कुछ सिद्धांत बताए हैं जो कि निम्न है ➖

1) जीन पियाजे स्विट्जरलैंड के मनोवैज्ञानिक थे |

2) इन्होंने अल्फ्रेड बिने के साथ बुद्धि परीक्षण किया |

3) इन्होंने बच्चे के संज्ञानात्मक विकास पर कार्य किया |

4) संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत प्रतिपादित किया |

5) बालक की वास्तविकता के स्वरूप के बारे में चिंतन करने के लिए खोज करने की शक्ति न सिर्फ परिपक्वता के स्तर पर और ना ही अनुभव पर निर्भर करती है बल्कि दोनों की अंतः क्रिया पर निर्भर करती है |

चिंतन/ खोज की शक्ति➖ परिपक्वता+ अनुभव

जैसे जैसे बच्चे की उम्र बढ़ती है वैसे ही उसका अनुभव भी बढ़ता है यदि बच्चा बड़ा होता है तो उससे उम्मीदें भी बढ़ती जाती है जो अनुभव से प्राप्त होती हैं यदि उस का अनुभव नहीं बढ़ेगा तो उससे उम्मीदें भी पूरी नहीं हो सकती है जो भी समाज के द्वारा ही पूरी हो सकती है|

पियाजे ने बताया कि बच्चा 2 वर्ष तक वस्तु स्थायित्व प्राप्त कर लेता है तथा 2 से 7 वर्ष की आयु में मूर्त चीजों पर प्रत्यक्ष अनुभव करने लगता है |

🎯 संज्ञानात्मक विकास के संप्रत्यय ➖

💫 अनुकूलन (Adaptation) ➖

बालकों में वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने की जन्मजात प्रवृत्ति अनुकूलन है |

अनुकूलन को दो भागों में बांटा गया है ➖

1) आत्मसातकरण

2) समायोजन

🔅 आत्मसातकरण ➖

पूर्व अनुभव के आधार पर नए अनुभव के साथ सामंजस्य स्थापित करना ही आत्मसातकरण है |

या पूर्व में सीखे हुए ज्ञान को नए ज्ञान में प्रयोग करना |

अर्थात कह सकते हैं कि जब

” बालक समस्या समाधान के लिए या वातावरण के साथ संबंध स्थापित करने के लिए पूर्व में की गई क्रियाओं का सहारा लेता है तो उसे आत्मसातकरण कहते हैं |

🔅 समायोजन ( Accomodation) ➖

इसमें बच्चा तत्काल परिस्थिति के अनुसार योजना बनाता है या व्यवहार में परिवर्तन करता है |

अर्थात इसमें पूर्व में सीखी हुई क्रिया काम नहीं आती है बल्कि अपनी योजना या व्यवहार में परिवर्तन से नए वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करना ही समायोजन कहलाता है |

🎯 साम्यधारण ( Equilibrium) ➖

आत्मसातकरण और समायोजन के बीच संतुलन स्थापित करना भी साम्यधारण है |

🎯 संरक्षण( Protection) ➖

किसी वस्तु के रूप, रंग में परिवर्तन को अपने पूर्व अनुभव के आधार पर समझते हैं तो वह संरक्षण है और यदि पूर्व ज्ञान का प्रयोग नहीं कर पाए तो पूर्व ज्ञान कोई काम का नहीं है |

या वातावरण में परिवर्तन तथा स्थिरता को पहचानने और समझने की क्षमता ही संरक्षण है |

🎯संज्ञानात्मक/ मानसिक संरचना ( Cognative Structure) ➖

किसी भी बच्चे की अंदर मस्तिष्क में जो चीजें संगठित हैं वह मानसिक संरचना है |

मानसिक संरचना➖ मानसिक संगठन+ मानसिक क्षमता |

🎯 मानसिक संक्रिया (Mental Opration) ➖

किसी समस्या के समाधान पर चिंतन करना मानसिक संक्रिया करना माना जाता है |

🎯 स्कीम्स ( schemes) ➖

व्यवहारर का जो संगठित पैटर्न है उसको आसानी से दोहराया जा सके वही संगठित पैटर्न स्कीम्स कहलाता है |

🎯 स्कीमा (Schema) ➖

स्कीमा एक ऐसी मानसिक संरचना है जिसका सामान्यीकरण किया जाता है |

🎯 विकेन्द्रीकरण ( Decentralization) ➖

किसी भी वस्तु एक चीज के बारे में वास्तविक ढंग से सोचने की क्षमता विकेंद्रीकरण कहलाती है |

𝙉𝙤𝙩𝙚𝙨 𝙗𝙮➖ 𝙍𝙖𝙨𝙝𝙢𝙞 𝙎𝙖𝙫𝙡𝙚

🌻🌼🍀🌸🌺🌻🌼🍀🌸🌺🌻🌼🍀🌸🌺🌻🌼🍀🌸🌺

🌹 जीन पियाजे , कोहलवर्ग और वाइगोत्सकी 🌹
🌹 Jean Piaget , Kohlberg & Vygotsaki 🌹

🌲मानव की वृद्धि / विकास के अलग अलग आयाम है।

👉जीन पियाजे / वाइगोत्सकी संज्ञानात्मक क्षेत्र से जुड़े हैं।

👉कोहलवर्ग नैतिक विकास की बात करते हैं।

🌺 जीन पियाजे 🌺
Jean Piaget.

👉जीन पियाजे स्विट्जरलैंड के मनोवैज्ञानिक थे।

👉जीन पियाजे ने अल्फ्रेड बिने के साथ बुद्धि परीक्षण पर कार्य किया।

👉बच्चे के संज्ञानात्मक विकास पर कार्य किया।

👉जीन पियाजे ने ” संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत ” प्रतिपादित किया।

👉जीन पियाजे ने अपने सिद्धांत का प्रयोग अपने ही बच्चों पर किया था।

बालक में वास्तविकता के स्वरूप के बारे में चिंतन करने या खोज करने की शक्ति ना सिर्फ परिपक्वता के स्तर पर निर्भर करती है ना सिर्फ अनुभवों पर , बल्कि परिपक्वता और अनुभव दोनों के अंतःक्रिया पर निर्भर करती है।

अर्थात्

🌲[ चिंतन / खोज की शक्ति = परिपक्वता + अनुभव ]

🌺परिपक्वता + अनुभव 🌺
Age + Experience

जीन पियाजे के अनुसार 2 वर्ष में , बच्चों में वस्तु स्थायित्व का गुण आ जाता है और बच्चे मूर्त चीजों में अपने प्रत्यक्ष अनुभवों को भी शामिल करलेता है।

🌷🌷 संज्ञानात्मक विकास के संप्रत्यय :-

🌲🌺 अनुकूलन ( अपनाना ) Adaptation :-

बालकों में वातावरण के साथ सामंजस करने की जन्मजात प्रवृत्ति ही “अनुकूलन ” कहलाती है।

🌷 अनुकूलन के निम्नलिखित दो प्रकार हैं :-

1. आत्मसात्करण

2. समायोजन

🌲 आत्मसात्करण ( पूर्व ज्ञान ) Assimilation :-

जब बालक समस्या समाधान के लिए या वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए ” पूर्व में सीखी हुई क्रियाओं या ज्ञान” का सहारा लेता है,
इसे ही “आत्मसात्करण” कहते हैं।

🌲 समायोजन ( योजना व्यवहार परिवर्तन ) Accommodation :-

पूर्व में सीखी हुई क्रिया हमेशा काम नहीं आती,अतः यहां अपनी योजनाओं, व्यवहार में परिवर्तन से नए वातावरण में सामंजस्य स्थापित करते हैं, इसे ही समायोजन कहते हैं।

🌷 साम्यधारण Equilibrium :-

साम्यधारण में बच्चा “आत्मसात्करण” और “समायोजन” के बीच संतुलन स्थापित करता है।

🌷 संरक्षण Protection :-

वातावरण में परिवर्तन तथा स्थिरता को पहचानने और समझने की क्षमता ही संरक्षण कहलाता है।

🌷 संज्ञानात्मक / मानसिक संरचना
Cognitive/ Mental Structure :-

संज्ञानात्मक/ मानसिक संरचना में मानसिक संगठन और मानसिक क्षमता को महत्वपूर्ण माना जाता है।

[ मानसिक “संगठन” + मानसिक “क्षमता” ]

🌷 मानसिक संक्रिया Mental Operation :-

किसी भी समस्या के समाधान पर चिंतन मानसिक संक्रिया करना ही माना जाता है।
अर्थात दिमाग से सोचना/ दिमाग लगाना

🌷 स्कीम्स Schems :-

व्यवहार के संगठित पैटर्न , जिसको आसानी से दोहराया जा सके वही संगठित पैटर्न ” स्कीम्स ” कहलाता है।

🌷 स्कीमा Scheme :-

स्कीमा एक मानसिक संरचना है जिसका सामान्यीकरण करना ही ” स्कीमा ” कहलाता है।

🌷 विकेंद्रीकरण Decentralization :-

किसी भी वस्तु या चीज के बारे में वास्तविक ढंग से सोचने की क्षमता ही “विकेंद्रीकरण ” कहलाती है।

🌺✒️ Notes by – जूही श्रीवास्तव ✒️🌺

🔥जीन पियाजे , कोहलबर्ग और वाइगोत्सकी 🔥

🌟मानव के वृद्धि/ विकास के अलग अलग आयाम हैं ।

🌟 पियाजे और वाइगोत्सकी संज्ञानात्मक क्षेत्र से जुड़े हैं।

🌟 कोहलवर्ग नैतिक विकास की बात करते हैं।

*जीन पियाजे का सिद्धांत* 🔥🔥

🌟जीन पियाजे स्विट्जरलैंड के मनोवैज्ञानिक थे ।

🌟अल्फ्रेड बिने के साथ बुद्धि परीक्षण पर कार्य किया था।

🌟 बच्चे के संज्ञानात्मक विकास पर कार्य किया।

🌟 संज्ञानात्मक विकास का सिद्धांत प्रतिपादित किया।

👉 बालक में वास्तविकता के स्वरूप के बारे में चिंतन करने या खोज करने की शक्ति ना सिर्फ परिपक्वता के स्तर पर निर्भर करती है ना सिर्फ अनुभव पर बल्कि दोनों के अंत: क्रिया पर निर्भर करती है। अर्थात्

✌️चिंतन /खोज की शक्ति
=परिपक्वता+ अनुभव

👉जीन पियाजे के अनुसार जब बच्चा 2 वर्ष का होता है तो उस में वस्तु स्थायित्व का गुणा जाता है।

👉 जब बच्चा 7 से 14 वर्ष का होता है तो वह मूर्त चिंतन करने लगता है।

संज्ञानात्मक विकास के संप्रत्यय 🔥👉

अनुकूलन (adaptation) 🔥

बालकों में वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने की जन्मजात प्रवृत्ति ,”अनुकूलन” कहलाती है।यह दो प्रकार के होते हैं- आत्मसात्करण तथा समायोजन।

1.आत्मसात्करण (assimilation) 🔥

जब बालक समस्या समाधान के लिए या वातावरण के साथ सामंजस्य स्थापित करने के लिए पूर्व में ही सीखी क्रियाओं का सहायता लेता है, आत्मसात्करण कहलाता है।

2.समायोजन (accomodation)🔥

समायोजन में पूर्व में सीखी गई क्रिया काम नहीं आती बल्कि अपनी योजना या व्यवहार में परिवर्तन से नए वातावरण में सामंजस्य स्थापित करते हैं।

साम्यधारण (equilibrium) 🔥

साम्यधारण में बच्चा आत्मसात्करण और समायोजन के बीच संतुलन स्थापित करता है।

संरक्षण (protaction)🔥

वातावरण में परिवर्तन तथा स्थिरता को पहचानने और समझने की क्षमता संरक्षण है।

संज्ञानात्मक संरचना/मानसिक संरचना (cognitive structure/mental structure) 🔥🔥

मानसिक संगठन+मानसिक क्षमता=
संज्ञानात्मक संरचना

मानसिक संक्रिया (mental operation)🔥🔥

समस्या का समाधान पर चिंतन करना, मानसिक संक्रिया कहलाता है।

स्कीम्स (schemes)🔥

व्यवहार के संगठित पैटर्न जिसको आसानी से दोहराया जा सके, वही संगठित पैटर्न स्कीम्स कहलाता है।

स्कीमा (schema)🔥

Schema मानसिक संरचना है जिसका सामान्यीकरण करना है।

विकेंद्रीकरण (decentralisation)🔥

किसी भी वस्तु या चीज के बारे में वास्तविक ढंग से सोचने की क्षमता विकेंद्रीकरण का लाती है।

नोट्स- श्रेया राय 🙏🙏

By admin

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