कर्ट लेविन के क्षेत्र सिद्धांत का आधार

1. क्षेत्र -इस आधार में हमारे मनोविज्ञान से लक्ष्य निर्धारित होते हैं। हमारे मनोविज्ञान में हमारे विचार ,तथ्य ,धारणाएं, कल्पनाएं ,विश्वास आशाएं आदि आते हैं।

2. जीवन विस्तार-जीवन विस्तार में वातावरण का प्रभाव मनुष्य पर पड़ता है यह वातावरण प्राकृतिक, सामाजिक और मनोवैज्ञानिक हो सकता है।

वातावरण में मनुष्य संघर्ष करते हैं और वातावरण से प्रभावित होते हैं।

हमारी योग्यता ,सीमा जीवन विस्तार की सीमा से घिरी होती है।

3. व्यक्ति- प्रत्येक व्यक्ति की अपनी आवश्यकता होती है आवश्यकता ही व्यक्ति के व्यवहार को निर्देशित करती हैं। आवश्यकता व्यक्ति को लक्ष्य की ओर मोड़ देती है।

व्यक्ति में – (मैं,मेरा, मुझे) आता है।

अगर व्यक्ति अवरोध पार नहीं कर पाता है तो वह अपने लक्ष्य तक नहीं पहुंच पाएगा। और बार-बार प्रयत्नशील    रहेगा।

4. बाह्य आवरण – हमारा बाह्य आवरण , जीवन विस्तार के चारों ओर घिरा रहता है ‌ इसमें शारीरिक और मानसिक दोनों क्षेत्र आते हैं।

5. तलरूप- लेविन ने गणित के आधार पर मानव व्यवहार को समझाया।

तलरुप उद्देश्य, उनकी प्राप्ति के बीच की बाधा के संदर्भ में व्यक्ति की स्थिति स्पष्ट करता है।

6. सदिश- सदिश एक भौतिकी की संप्रत्यय है।

सदिश एक बल का प्रतिनिधित्व करता है।

यह बल व्यक्ति के व्यवहार को लक्ष्य की ओर या लक्ष्य से दूर की ओर संबोधित करता है।

सदिश – विशेष दिशा में जाने की प्रवृत्ति को दर्शाता है।

7. कर्षण शक्ति- कर्षण शक्ति दो प्रकार की होती है आकर्षण और प्रतिकर्षण।

आकर्षण का अर्थ होता है नजदीक या सकारात्मक

प्रतिकर्षण का अर्थ होता है दूर या नकारात्मक

कर्षण शक्ति को मौरिस एल बिग्गी ने भी बताया है।

8.  अवरोध- अवरोध लक्ष्य तक पहुंचने के बीच की रुकावट होती हैं। यह लक्ष्य तक पहुंचने में समस्या उत्पन्न करती हैं।

समस्या को दूर करने के लिए अभिप्रेरणा आती है और समस्या का समाधान हो जाता है या  लक्ष्य आसान हो जाता है।

9. द्वंद्व- एक ही समय में विभिन्न प्रकार के कर्षण (या तो आकर्षण होगा या प्रतिकर्षण होगा) उत्पन्न होते हैं। 

तब द्वंद्व की स्थिति उत्पन्न होती है।

Notes by Ravi kushwah

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