मनोविज्ञान का परिचय

बचपन-मानव जीवन का सबसे महत्वपूर्ण अवस्था है,यह बच्चे के विकास की शानदार आधारशिला बनाने का समय है।

सिग्मन फ्रायड का कथन “प्राणी चार पांच साल की उम्र में जो कुछ बनना होता है बन जाता है”
जीवन की प्रारंभिक अवस्था सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है।

बाल विकास को दो भागों में विभाजित किया गया है;
🏵️1-पहला- बाल मनोविज्ञान-
🌻2-दूसरा -विकासात्मक मनोविज्ञान

1-बाल+मनोविज्ञान। =बालमनोविज्ञान;
बाल का अर्थ है- वह प्राणी जो अभी प्रौण नहीं हुआ हैं।(गर्भावस्था से किशोरावास्था तक)

मनोविज्ञान का अर्थ-
आत्मा का विज्ञान;
मस्तिष्क का विज्ञान;
चेतना का विज्ञान;
व्यवहार का विज्ञान इत्यादि से है;

क्रो एवं क्रो के अनुसार-
बाल मनोविज्ञान,वह वैज्ञानिक अध्ययन या जो व्यक्ति के विकास का अध्ययन कार्यकाल की प्रारंभिक अवस्था से किशोरावस्था तक रहता है।

जेंम्स ड्रेवर के अनुसार÷
“मनोविज्ञान की वह शाखा है ,जो प्राणी के विकास का अध्ययन जन्म से परिपक्वता तक करते हैं।

🌻2– दूसरा विकासात्मक मनोविज्ञान

🌻@ विकासात्मक मनोविज्ञान जन्म के पूर्व से लेकर जीवनपर्यंत तक के विकास का अध्ययन करता है।

@ विस्तृत और व्यापक होता है।

@ गर्भ से जीवन पर्यन्त तक विकास का अध्ययन करता है।

@ रचनात्मक परिवर्तन हीं परिपक्वता लाती है।

🌺🌺 मनोविज्ञान एवं विकासात्मक मनोविज्ञान में अंतर निम्नलिखित हैं÷

🏵️1-क्षेत्र में अंतर-
🌸बाल मनोविज्ञान-गर्भ से लेकर किशोरावस्था तक
🌻विकासात्मक मनोविज्ञान-गर्भ से जीवन पर्यन्त तक;

🏵️2 उद्देश्य मे अंतर
🌸बाल मनोविज्ञान में बालक के मन और व्यवहार को समझना;
🌻विकासात्मक मनोविज्ञान में बच्चे के भूत और भविष्य से वर्तमान को जोड़ना;

🏵️3-दृष्टिकोण-
🌸बाल मनोविज्ञान ÷इसमें बालक की क्षमता को जानने की कोशिश, जो कि बड़ो से अलग है;
🌻विकासात्मक मनोविज्ञान÷ इसमें क्षमता बढ़ाने की ,वा बच्चे उस परिपक्वता तक कैसे पहुंचे;

🌷धन्यवाद🌷

Written by -shikhar pandey 🥀

🌸 Introduction of child development and pedagogy🌸

🌺 बाल मनोविज्ञान का परिचय🌺
बचपन-संपूर्ण मानव जीवन का अत्यंत ही महत्वपूर्ण अवस्था है, यह एक बच्चे के विकास की शानदार आधारशिला बनाने का समय है।

🤵🏻‍♂सिग्मंड फ्रायड के अनुसार➖ प्राणी चार पांच साल की उम्र में जो कुछ बनना होता है बन जाता है।
जीवन की प्रारंभिक अवस्था सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है।

💫 बाल विकास को दो भागों में बांटा गया है

♦️ 1-बाल मनोविज्ञान
♦️2- विकासात्मक मनोविज्ञान

1-बाल मनोविज्ञान =बाल+मनोविज्ञान

बाल का अर्थ है-वह प्राणी जो अभी प्रौढ़ नहीं हुआ है। (गर्भावस्था से किशोरावस्था)

मनोविज्ञान का अर्थ- मन का विज्ञान
आत्मा का विज्ञान
व्यवहार का विज्ञान

🤵🏻‍♂क्रो एंड क्रो के अनुसार➖बाल मनोविज्ञान वह वैज्ञानिक अध्ययन है जो व्यक्ति के विकास का अध्ययन गर्भ काल की प्रारंभिक अवस्था से किशोरावस्था तक करता है।

🤵🏻‍♂जेम्स ड्रेवर के अनुसार➖ बाल मनोविज्ञान वह शाखा है जो प्राणी के विकास का अध्ययन जन्म से परिपक्वता तक करता है।

🌸 2-दूसरा विकासात्मक मनोविज्ञान

💫 विकासात्मक मनोविज्ञान जन्म से पूर्व से लेकर जीवन पर्यंत तक के विकास का अध्ययन करता है।

💫 विस्तृत और व्यापक होता है।
💫 रचनात्मक परिवर्तन ही परिपक्वता लाती है।

🌸🌺 मनोविज्ञान एवं विकासात्मक मनोविज्ञान में अंतर निम्नलिखित है।

💫 क्षेत्र में अंतर
🌸 बाल मनोविज्ञान- गर्भ से लेकर किशोरावस्था तक

🌺 विकासात्मक मनोविज्ञान- गर्भ से जीवन पर्यंत तक

💫 उद्देश्य में अंतर

🌸 बाल मनोविज्ञान में मन और व्यवहार का अध्ययन किया जाता है

🌺 विकासात्मक मनोविज्ञान में बच्चे के भूत और भविष्य से वर्तमान को जोड़ना

💫 दृष्टिकोण में अंतर

🌸 बाल मनोविज्ञान-इसमें बालक की क्षमता को जानने की कोशिश जो कि बड़ों से अलग है

🌺 विकासात्मक मनोविज्ञान-इसमें क्षमता बढ़ाने की वह बच्चे उस परिपक्वता तक कैसे पहुंचे,

✍🏻📚📚 Notes by…..
Sakshi Sharma📚📚✍🏻

बालविकास / बाल मनोविज्ञान का उद्भव / परिचय
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बचपन संपूर्ण मानव जीवन की अत्यंत ही महत्वपूर्ण अवस्था होती है।

बचपन एक बच्चे के विकास के शानदार आधारशिला बनाने का सबसे सुनहरा समय होता है।

🌺 सिग्मंड फ्रायड के अनुसार- :

” प्राणी चार – पांच साल की उम्र में जो कुछ बनना होता है बन जाता है। “

अर्थात् मनुष्य को भविष्य में जो बनना होता है उसके लक्षण प्रारम्भिक जीवन के 4 – 5 वर्ष में ही दिख जाते हैं।

” जीवन की प्रारंभिक अवस्था सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती है। “

🌺 क्रो & क्रो के अनुसार – :

बाल मनोविज्ञान , वह वैज्ञानिक अध्ययन है जो व्यक्ति के विकास का अध्ययन गर्भकाल की प्रारंभिक अवस्था से किशोरावस्था तक करता है।

🌺 जेम्स ड्रेवर के अनुसार – :

बाल मनोविज्ञान , मनोविज्ञान की वह शाखा है जो प्राणी के विकास का अध्ययन जन्म से परिपक्वता तक करती है। 🌻 बाल विकास 🌻

बाल विकास को निम्नलिखित दो भागों में विभाजित किया गया है -:

👉 1. बाल मनोविज्ञान

👉 2. विकासात्मक मनोविज्ञान

👶👩 बालमनोविज्ञान 👩👶 बाल + मनोविज्ञान

👉 यहाँ बाल का अर्थ है :-

वह प्राणी जो अभी प्रौढ़ नहीं हुआ है अर्थात -: बालक अवस्थागत रूप से गर्भावस्था से किशोरावस्था तक

👉 मनोविज्ञान का अर्थ है :-

प्राणी / बालक के

मन का विज्ञान
आत्मा का विज्ञान
चेतना का विज्ञान
व्यवहार का विज्ञान

विकासात्मक मनोविज्ञान

Development psychology
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विकासात्मक मनोविज्ञान का क्षेत्र विस्तृत / व्यापक होता है।

इसके अंतर्गत गर्भ से सम्पूर्ण जीवन तक विकास का अध्ययन करते हैं।

रचनात्मक परिवर्तन ही व्यक्ति में परिपक्वता लाती है।

बाल मनोविज्ञान / विकासात्मक मनोविज्ञान में अंतर :-
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  1. क्षेत्र में अंतर :-

बालमनोविज्ञान :- गर्भ से 18 वर्ष तक

विकासात्मक मनोविज्ञान :- गर्भ से जीवन पर्यन्त

  1. उद्देश में अंतर :-

बालमनोविज्ञान :- बालक के मन और व्यवहार का अध्ययन किया जाता है।

विकासात्मक मनोविज्ञान में :- बच्चे के भूत और भविष्य से वर्तमान को जोड़ना

  1. दृष्टिकोण में अंतर -: बालविकास :- इसमें बलकों की क्षमता को जानने की कोशिश करते हैं जो कि क्षमता से बड़ों से अलग है।

विकासात्मक :- क्षमता विकास capacity development , Maturity कैसे पायें।

🌺✍️🏻Notes by जूही श्रीवास्तव✍️🏻🌺

बाल विकास का परिचय

अध्यापक को छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाना होता है

पढ़ाना कैसे हैं
इसका क्षेत्र बहुत व्यापक है
इसके लिए पढ़ाने से पहले अध्यापक को बच्चों को समझना होता है।
कि बच्चे कैसे सोचते हैं बच्चे कैसे सीखते हैं बच्चे का व्यवहार कैसा है बच्चे कब अधिक सीखते हैं बच्चे कब कम सीखते हैं बच्चे की बुद्धि क्या है आयु स्तर क्या है
आदि को जानने के लिए अध्यापक को बाल विकास का अध्ययन करना होता है।

बचपन संपूर्ण मानव जीवन का अत्यंत ही महत्वपूर्ण अवस्था है।
यह एक बच्चे के विकास की शानदार आधारशिला बनाने का समय है।

फ्रायड के अनुसार- प्राणी चार- पांच साल की उम्र में जो कुछ बनना होता है ,बन जाता है।
अर्थात्
जीवन की प्रारंभिक अवस्था, सबसे महत्वपूर्ण अवस्था होती हैं।

बाल विकास

बाल विकास को दो भागों में बांटा गया है
1.बाल मनोविज्ञान
2.विकासात्मक मनोविज्ञान

बाल मनोविज्ञान-

बाल+ मनोविज्ञान= बाल मनोविज्ञान

बाल- वह प्राणी जो अभी प्रौढ नहीं हुआ है अर्थात्
गर्भावस्था से किशोरावस्था में है

मनोविज्ञान- मन का विज्ञान ,चेतना का विज्ञान, आत्मा का विज्ञान , व्यवहार का विज्ञान

क्रो एंड क्रो के अनुसार –
बाल मनोविज्ञान, वह वैज्ञानिक अध्ययन है, जो व्यक्ति के विकास का अध्ययन गर्भकाल की प्रारंभिक अवस्था से किशोरावस्था तक करता है।

की पोइंट- गर्भकाल की प्रारंभिक अवस्था से किशोरावस्था तक का अध्ययन

जेम्स ड्रेवर के अनुसार-
बाल मनोविज्ञान ,मनोविज्ञान की वह शाखा है, जो प्राणी के विकास का अध्ययन जन्म से परिपक्वता तक करते हैं।

की पोइंट- जन्म से परिपक्वता तक का अध्ययन

विकासात्मक मनोविज्ञान

इसका क्षेत्र बहुत व्यापक और विस्तृत होता है
यह गर्भ से जीवन पर्यंत विकास का अध्ययन करता है
रचनात्मक परिवर्तन ही परिपक्वता लाती है। अर्थात व्यक्ति को हमेशा अपने कार्य को कुछ नए ढंग से करते रहना चाहिए जिससे कि उसे उस कार्य को करने में मजा आये।और हमेशा सिखता रहे।

बाल मनोविज्ञान और विकासात्मक मनोविज्ञान में अंतर

क्षेत्र में अंतर –
बाल मनोविज्ञान में गर्भ से लेकर किशोरावस्था तक का अध्ययन किया जाता है जबकि विकासात्मक मनोविज्ञान में गर्भ से लेकर जीवन पर्यंत चलने वाले विकास का अध्ययन किया जाता है।

उद्देश्य में अंतर-
बाल मनोविज्ञान का उद्देश्य बालक के मन और व्यवहार को समझना है जबकि विकासात्मक मनोविज्ञान का उद्देश्य बच्चे के भूत और भविष्य से वर्तमान को जोड़ना है

दृष्टिकोण में अंतर –
बाल मनोविज्ञान में बालक की क्षमता को जाना जाता है जो बड़ों से अलग हैं जबकि विकासात्मक मनोविज्ञान में उस क्षमता के विकास पर बात करता है जिसके आधार पर आज का बालक कल परिपक्व हो सके।

Notes by Ravi kushwah

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